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एम्स निर्माण में 40 एकड़ के पैच के साथ मुआवजा व एससीओ का पेंच

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मनेठी में प्रस्तावित एम्स निर्माण में पांच साल के दौरान एक के बाद एक अड़ंगा लग रहा है, हालात ऐसे हैं कि दो कदम आगे बढ़ते हैं तो चार कदम पीछे चले जाते हैं। करीब पांच दिन पहले चंडीगढ़ में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जहां 40 एकड़ पैच के समाधान की तरफ आगे बढ़ते दिखाई दिए, अब मुआवजा व एससीओ की मांग एक बार फिर से बाधा बनती दिखाई दे रही है। सरकार जहां प्रति एकड़ 24 लाख रुपये सर्कल रेट और 5 लाख रुपये ऊपर देने की बात कह रही है, वहीं किसान कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजा व एक-एक एसओसी की मांग रख रहे हैं। वर्ष 2015 में बावल रैली के दौरान सीएम मनोहरलाल द्वारा एम्स निर्माण की घोषणा के बाद से ही समाधान से ज्यादा बाधाओं को देखते हुए अब कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि यदि यहां के बड़े नेेताओं ने किसानों व सरकार के बीच में मामले का समाधान नहीं कराया तो हालात लॉजिस्टिक हब जैसे बन सकते हैं। ऐसे में अब यहां के सांसद से लेकर मंत्री व विधायकों को जल्द किसानों के बीच जाकर मसले का समाधान कराना चाहिए ताकि क्षेत्र के विकास के लिए एम्स निर्माण शुरू हो सके। रविवार को मुआवजे की मांग को लेकर ही एम्स संघर्ष समिति की ओर से बैठक बुलाई गई थी, जिसमें निर्णय लिया गया कि मुआवजे की मांग को लेकर सीएम मनोहरलाल, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत व सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल सहित क्षेत्र के अन्य मंत्रियों व विधायकों से मिला जाएगा।
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किसानों का तर्क : हाईवे में एक करोड़ तक का मुआवजा
नेशनल हाईवे अथॉरिटी की ओर से एनएच-11 का निर्माण किया जा रहा है। किसानों का तर्क है कि मनेठी की जमीन के लिए ही हाईवे की ओर से बतौर एक करोड़ तक का मुआवजा दिया जा चुका है। एम्स संघर्ष समिति की आपताकालीन बैठक में रविवार को सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार की मांग पर गांव माजरा-भालखी के किसानों द्वारा 369 एकड़ भूमि ई-पोर्टल पर चढ़ा दी गई है। सरकार से अनुरोध है कि किसानों को न्याय व समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए प्रति एकड़ 50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री से हुई बातचीत के अनुसार जमीन देने वाले किसानों को एससीओ भी दिया जाए। समिति ने निर्णय लिया कि 2 अक्तूबर 2018 से एम्स के लिए संघर्ष आरंभ किया गया था, इसलिए 2 अक्तूबर 2020 को संघर्ष दिवस के रूप में मनाया जाएगा। बता दें कि एम्स निर्माण के लिए सरकार को 200 एकड़ जमीन की जरूरत है, लेकिन 200 एकड़ जमीन संयुक्त रूप से नहीं मिल पाई है। जो जमीन किसानों की ओर से ई-भूमि पोर्टल पर अपलोड की गई है, जमीन के बीच 40 एकड़ का पैच है। इसके समाधान के लिए प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
मुआवजा विवाद में बावल से महेंद्रगढ़ चला गया था लॉजिस्टिक हब
बावल में 1100 एकड़ में बनने वाला लॉजिस्टिक हब मुआवजे के विवाद में महेंद्रगढ़ जा चुका है। बावल में बनने वाले इस हब के लिए सरकार ने भूमि अधिग्रहण कर अवार्ड भी घोषित कर दिया था, मगर किसान उनको मिलने वाले मुआवजे से संतुष्ट नहीं थे। 2014 में सरकार ने आनन फानन में इसको रद्द कर दिया तथा इसके बाद से सरकार इसको जल्द से जल्द बनाना चाहती है। वर्ष 2016 में महेंद्रगढ़ के निजामपुर क्षेत्र में लॉजिस्टिक हब को मंजूरी मिली थी। ऐसे में एक बार फिर से कहीं मुआवजा विवाद में एम्स भी कहीं अन्य स्थान पर न चला जाए। ऐसे में किसानों से लेकर इससे जुड़े प्रत्येक पक्ष को तत्काल समाधान की ओर आगे बढ़ना होगा। बता दें कि यहां पर भी सरकार की ओर से कुछ किसानों की जमीन का अवार्ड 1.64 करोड़ तक सुनाया गया था तो कुछ किसानों की जमीन का महज 40 लाख रुपये दिया जा रहा था। इसको लेकर ही किसान विरोध कर रहे थे।
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किसानों को मिलना चाहिए 50 लाख रुपये का मुआवजा: श्योताज सरपंच
एम्स संघर्ष समिति के प्रधान श्योताज सिंह ने कहा कि किसान हाईवे जितना मुआवजा नहीं मांग रहे हैं। कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजा तो मिलना ही चाहिए। रविवार को हुई बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में दिलबाग सिंह, पृथ्वीपाल पूर्व पार्षद माजरा, कप्तान मनफूल सिंह, सुरेश कुमार पूर्व सरपंच, हरिराम खोल, मास्टर दयाराम, कप्तान राजकुमार निमोठ, बीडी यादव, मास्टर लक्ष्मण सिंह यादव, डॉ. एचडी यादव, कामरेड राजेंद्र सिंह, जिला पार्षद आजाद सिंह नांधा, जितेन्द्र कुमार, प्रेस सचिव ओमप्रकाश सैन आदि थे। बैठक में देशराज, घीसाराम, बस्तीराम, दलबीर सिंह, पंच विनोद सितारा, डॉ. नरेन्द्र, रामस्वरूप अहरोदिया, ईश्वर सिंह, कमल सिंह, राजरानी नंबरदार, रामनिवास, भागीरथ, रामफल, अशाकुमार गुमार, अभय गुणवाल व सत्यप्रकाश सहित आसपास के अनेक गांव के लोग मौजूद रहे।
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