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Rewari News: उपभोक्ता आयोग में हर साल 49% मामले सिर्फ बीमा क्लेम के आ रहे

Tue, 09 Apr 2024 01:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी। जिला उपभोक्ता आयोग कार्यालय। संवाद
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प्रवेश चौहान
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रेवाड़ी। जिला उपभोक्ता आयोग में बीमा क्लेम से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीते 3 साल का रिकॉर्ड देखें तो करीब 49 फीसदी मामले बीमा क्लेम से ही जुड़े हैं। अन्य मामलों में इलेक्ट्रिसिटी, सेवा में कमी, हाउसिंग, बैंकिंग, बिजली का सामान, ऑटोमोबाइल, फाइनेंस, अनुचित व्यापार, मेडिकल, कृषि, शिक्षा, डाक आदि शामिल हैं। यह सभी मामले 10 प्रतिशत से नीचे दर्ज किए गए हैं।
2024 में 8 अप्रैल तक 15 सेक्टरों से जुड़े 379 मामले सामने आए हैं। इनमें बीमा क्लेम के मामलों की संख्या 49 फीसदी है। 2023 में आयोग में 1190 मामले सामने आए। इसमें भी बीमा क्लेम से जुड़े मामलों की संख्या 47 प्रतिशत थी। इन मामलों में 200 मामले ऐसे थे, जो पिछले वर्षों के थे। वर्ष 2022 में उपभोक्ता आयोग में 602 केस आए थे। इनमें बीमा क्लेम के 48 फीसदी मामले थे। साल 2010 से 2021 तक जितने भी मामले उपभोक्ता आयोग में आए थे उनमें से करीब 99 फीसदी मामलों का निपटारा हो चुका है।
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उपभोक्ता अधिकारों को लेकर लोग हो रहे जागरूक

वर्ष 2011 से लेकर अप्रैल 2024 तक उपभोक्ता आयोग में 7280 मामले सामने आए हैं। 2011 से लेकर 2020 तक 3836 मामले आए थे। 2022 से लेकर 2024 तक इन तीन सालों में 2171 मामले सामने आए हैं। बीते 3 सालों में 10 सालों के मुकाबले केसों में ज्यादा उछाल आया है। इसका मुख्य कारण उपभोक्ता अधिकारों को लेकर लोगों का जागरूक होना है।

बीमा कंपनी ग्राहकों को करती हैं परेशान

बीमा क्लेम से जुड़े जितने भी मामले सामने आते हैं, इनमें देखा गया है कि बीमा कंपनी ग्राहकों को जानबूझकर परेशान करती है, ताकि कंपनी बीमा देने से बच जाए। वहीं, जब कोई माध्यम नहीं होता है तो पीड़ित उपभोक्ता आयोग में केस दायर करता है। इसके बाद उपभोक्ता आयोग दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाता है।

जनवरी 2022 से लेकर 8 अप्रैल 2024 तक आए कुल केस

सेक्टर 2024 (अभी तक), 2023, 2022 (प्रतिशत में)

बीमा 49.08 :: 47.31 :: 48.17
इलेक्ट्रसिटी 11.35::9.83:::7.31
सेवा में कमी::10.55:13.70:::12.79
हाउसिंग 6.07::5.63:4.82
बैंकिंग 3.96:5.63:::4.98
बिजली का सामान 6.60::5.46:::6.31
ऑटोमोबाइल 4.22: 4.20:: :5.48
फाइनेंस 2.90: :2.60: :1.99
अनुचित व्यापार 185: 1.34: :1.50
मेडिकल 0.79: :1.09: :1.66
कृषि 0.29: 0.92: :00
शिक्षा 1.58: 0.84:: :1.33
डाक 0.26:0.25::0.33




2011 से लेकर अभी तक तक आए कुस केस

वर्ष केस रिजेक्ट
2011 169 1
2012 307 3
2013 369 1
2014 414 4
2015 411 8
2016 527 18
2017 419 5
2018 488 0
2019 379 1
2020 353 0
2021 273 0
2022 602 0
2023 1190 0
2024 (अब तक) 379 0

पहला मामला : जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने एक निर्णय में आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को गाड़ी डैमेज होने पर पूरा मुआवजा दिए जाने के आदेश दिए थे। इस मामले में इंश्योरेंस कंपनी ने गाड़ी का मुआवजा इस वजह से देने से मना कर दिया था कि गाड़ी डैमेज होने के बावजूद ड्राइवर को कोई चोट नहीं आई थी। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा व सदस्य राजेंद्र प्रसाद ने अपने संयुक्त निर्णय में स्पष्ट किया कि इंश्योरेंस कंपनी यह कहकर क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती कि ड्राइवर को एक्सीडेंट के दौरान कोई चोट नहीं आई थी। 35 हजार पर जुर्माना लगाया था।
दूसरा मामला : जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय जीवन बीमा निगम को बीमा राशि मृतक की नॉमिनी पत्नी को देने के आदेश जारी किए थे। जीवन बीमा निगम ने इसलिए राशि देने से मना कर दिया था, क्योंकि बीमा की किस्त एक माह के भीतर समय पर अदा नहीं की गई थी। गांव बुडौली निवासी गीता देवी के पति संजय कुमार ने जीवन बीमा पॉलिसी के तहत एक पॉलिसी जीवन लक्ष्य 10 अगस्त 2018 को दो लाख रुपये की बीमा राशि के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम से खरीदी थी, जिसकी 732 रुपये प्रतिमाह की किश्त अदा करनी थी, लेकिन अचानक संजय कुमार की मृत्यु 27 मार्च 2021 को करंट लगने से हो गई। इसके लिए क्लेम मांगा तो कंपनी ने मना कर दिया था।
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तीसरा मामला : बीमा कंपनी की ओर से इंश्योरेंस राशि का क्लेम न दिए जाने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने 20 हजार का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना शिकायतकर्ता के मेडिकल खर्च में आए बिलों का भुगतान न करने के कारण लगाया गया था। शहर के मोहल्ला महावीर नगर, कलाका रोड निवासी देवेंद्र शर्मा ने स्टार हेल्थ कंपनी से एक बीमा पॉलिसी ली हुई थी। मेडिकल कागजों में कमी के चलते स्टार हेल्थ कंपनी ने क्लेम देने से शिकायतकर्ता को मना कर दिया था।
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