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Rewari News: बिजली निगम ने बनाए चोरी के केस तो निचली अदालत ने किए रद

Sun, 14 Jan 2024 11:20 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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शहर के झज्जर रोड ​स्थित श​क्ति भवन। संवाद
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रेवाड़ी। दक्षिण हरियाणा विद्युत निगम ने गत दो वर्षों में लगातार बिजली आपूर्ति चोरी के मामलों में तेजी से कार्रवाई कर खूब वाहवाही लूटी। चोरी के आरोपियों पर नियम के मुताबिक उन पर भारी भरकम जुर्माना भी लगाया गया। इतना ही नहीं कानून के मुताबिक आरोपी व्यक्ति को आपराधिक मामले में भी दोषी बनाने के लिए कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब चोरी के यही केस अदालत में रद हो रहे हैं।
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वर्ष 2022-2023 के आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी तक रेवाड़ी कोर्ट में ही 200 से अधिक सिविल अपील निगम की ओर से दायर की जा चुकी है। सीधा अर्थ यह है कि निचली अदालत में निगम चोरी के दावों को साबित करने में असफल रहा है। अपने खिलाफ फैसला होने के बाद निगम ने प्रथम अपीलीय कोर्ट में अपील दायर की है। इतना ही नहीं आंकड़े बताते हैं कि दोनों सालों में डाली गई अपील में भी कामयाबी नहीं मिल पाई। साल 2022 में कुल 63 सिविल अपील दायर की गई थी, इसके अलावा साल 2023 में 119 सिविल अपील दायर की गई। जबकि इसके विपरीत निगम के खिलाफ निचली अदालत में केस डालने की संख्या देखी जाए तो 2022 में चोरी के आरोपी उपभोक्ताओं ने ही निगम के खिलाफ 105 मामले अदालत में दायर किए थे। वहीं, 2023 में 115 मामले दायर किए गए थे।

साल 2022-2023 में 200 से ज्यादा अपील दायर

न्यायालय में दायर मामलों के अनुसार अधिकतर मामलों में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम पूर्ण रूप से चोरी के दावों को साबित ही नहीं कर सका और नियमों के विरुद्ध कार्रवाई करने के कारण उनकी ओर से लगाई गई जुर्माना राशि एवं चोरी के आरोप को निरस्त करार दिया गया। न्यायालय के आंकड़ों के अनुसार ही अधिकतर मामलों में हार के बाद दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने जिला सत्र न्यायालय में अपील दायर की हुई है। साल 2022 और 2023 में कुल मिलाकर 200 से ज्यादा अपील दायर की जा चुकी है। इसके साथ ही इनमें कुछ अपीलों का निर्णय भी हो चुका है। इसमें निगम पूर्ण रूप से फेल साबित हुआ और अपील में भी अपने दावों को पूरा साबित नहीं कर सका।
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जुर्माना राशि कानून की दृष्टि से नहीं लगाई गई

सामान्य रूप में देखा जाए तो निगम ने जिस भी मामले में चोरी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ताओं से अवैध रूप से बिजली आपूर्ति चोरी करने के लिए जुर्माना राशि वसूली थी, वह जुर्माना राशि कानून की दृष्टि से सही तरीके से नहीं ली गई थी। इसलिए अदालतों में गवाही के बाद निगम की सभी कार्रवाइयों को निरस्त कर निगम के खिलाफ निर्णय दिए गए हैं।

बिजली चोरी पकड़ने के ये हैं नियम

दक्षिण हरियाणा बिजली विद्युत निगम में चोरी पकड़ने के लिए कुछ नियम तैयार किए गए हैं। यह नियम इलेक्ट्रिसिटी एक्ट एवं समय-समय पर निर्धारित सर्कुलर के आधार पर तैयार किए गए हैं। इस नियम के तहत चोरी के समय उपभोक्ता या चोरी के आरोपी के समक्ष निर्धारित टीम, इसमें तकनीकी एक्सपर्ट मौजूद रहते हैं, उनकी मौजूदगी में जांच की जानी आवश्यक है। अधिकारियों द्वारा जांच की टीम के समक्ष उपभोक्ता को जांच में शामिल होने के लिए कहा जाता है और जांच के बाद एलएल 1 रिपोर्ट तैयार करनी होती है। इस पर उपभोक्ता या संबंधित आरोपी के हस्ताक्षर कराए जाने अनिवार्य हैं।


बिजली मीटर में छेड़छाड़ या चोरी के संदेह होने में लगाना होता है नया मीटर

बिजली मीटर में छेड़छाड़ या चोरी के संदेह होने पर संबंधित टीम मीटर को उतार कर नया मीटर लगा देती है और पुराने मीटर को पैक कर सील लगाकर विभाग की लैब में चेकिंग के लिए भेजा जाता है। यह सभी कार्रवाई उपभोक्ता या आरोपी के सामने की जानी आवश्यक है। चेकिंग के दौरान टीम को कैमरे के द्वारा फोटो खींचनी होती है और उसकी वीडियोग्राफी करनी होती है। इतना ही नहीं यदि उपभोक्ता या आरोपी एलएल 1 रिपोर्ट पर साइन नहीं करते तो उसके पड़ोसी या जांच के समय मौजूद व्यक्ति के हस्ताक्षर एवं फोन नंबर दर्ज किए जाते हैं।

उपभोक्ता को नोटिस देना जरूरी

इसके साथ ही विभाग की ओर से एलएल 1 रिपोर्ट को आधार मानते हुए उपभोक्ता के मीटर की चेकिंग कराई जाती है और उसे चेकिंग के लिए भी लैब में संबंधित उपभोक्ता या आरोपी को बुलाने के लिए नोटिस दिया जाता है। लैब में जांच के समय उपभोक्ता के सामने जांच की जाती है और उस जांच में किसी भी प्रकार की मीटर या सील के साथ छेड़छाड़ होने या चोरी के संदर्भ में उपभोक्ता को सूचित कर नोटिस पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं। इसके बाद बिजली कानून की तहत धारा 135 जुर्माना राशि के लिए और 152 जिसमें चोरी के अपराध को कंपाउंड करने के लिए जुर्माना राशि तय कर उपभोक्ता को विभाग द्वारा उसके पते पर भेजी जाती है।
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वर्जन

इस मामले में फिलहाल अभी कुछ भी नहीं कह सकता हूं। रिकॉर्ड देखने के बाद ही कहना उचित रहेगा।

- मनोज यादव, एसई, दक्षिण हरियाणा विद्युत निगम रेवाड़ी।

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ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि बिजली निगम 200 मामले निचली अदालत से हार गई हो। नामुमकिन सा लग रहा है। इसकी समीक्षा की जाएगी।

- कुलदीप सिंह, एक्सईएन, दक्षिण हरियाणा विद्युत निगम रेवाड़ी।
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