पहले से ही तीन महीने देरी से चल रहा रेवाड़ी-मथुरा रूट पर स्टेशन के पास इलेक्ट्रिफिकेशन का काम ब्लॉक न मिलने के कारण रेलवे ने रोक दिया है। इससे दिसंबर में ट्रैक पर इलेक्ट्रिक ट्रेन नहीं दौड़ पाएगी। ऐसे में अलवर की ओर जाने वाले यात्रियों को कुछ समय तक डीजल इंजन से चलने वाली ट्रेनों में ही सफर करना पड़ेगा। रेलवे ने स्टेशन की तरफ काम बंद कर नारनौल ट्रैक पर काम शुरू कर दिया है।
अलवर से रेवाड़ी जंक्शन पर कुछ ही काम शेष रह गया है। अधिकारियों के मुताबिक रूट पर रेल यातायात अधिक सघन होने के कारण ट्रैक खाली न मिल पाने के कारण एक बार काम रोका है। ट्रैक पर दिनभर में 140 ट्रेनों का आवागमन हो रहा है। ट्रैक खाली न होने से काम प्रभावित हो रहा है। रेलवे ने अलवर से जंक्शन के पास डबल फाटक तक लाइन भी बिछा दी है। जंक्शन पर भी पोल लगा दिए हैं, इलेक्ट्रिक वायर बिछाने का काम ही बाकी रहा है।
अक्तूबर तक होना था काम पूरा
अलवर से मथुरा तक पहले इलेक्ट्रिक ट्रैक है और इसे रेवाड़ी तक बढ़ाया जाना है। यह कार्य को अक्तूबर तक पूरा होना था लेकिन ट्रेनों के व्यस्त शेड्यूल के कारण समय बढ़ाकर दिसंबर तक कर दिया था। इसके बावजूद रेलवे ब्लॉक हासिल नहीं कर पाया है। वहीं रेवाड़ी के बाद हिसार तक के ट्रैक का इलेक्ट्रिफिकेशन होना प्रस्तावित है।
गुजरती हैं 140 से ज्यादा गाड़ियां
रेवाड़ी से होकर 140 सवारी गाड़ियां गुजर रही हैं। इनमें कुछ साप्ताहिक भी हैं और 60 मालगाड़ियों को आवागमन हर रोज हो रहा है। यहां अलवर, दिल्ली, हिसार, महेंद्रगढ़, नारनौल और रोहतक की ओर लाइनें बिछी हुई हैं। ऐसे में गाड़ियों का दिनभर आवागमन बना रहता है।
इलेक्ट्रिफिकेशन से मिलेगा फायदा
इलेक्ट्रिक लाइन बिछने से रेवाड़ी से अलवर की एक्सप्रेस में ट्रेन की दूरी मात्र 40 मिनट की रह जाएगी। फिलहाल एक घंटे से ज्यादा का समय लगता है। वहीं पैसेंजर ट्रेन से यात्रा करने में भी आधे घंटे का फर्क पड़ेगा।