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बेटियों की सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं निजी स्कूल

Sun, 18 Sep 2016 02:36 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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मेंटेनेंस न होने से होती हैं दुर्घटनाएं - फोटो : Demo
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शहर के अधिकांश निजी स्कूलों की बसों में हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। ऐसा हम नहीं बल्कि स्कूली बसों में नियमों की अनदेखी करने के हालात बता रहे हैं। शनिवार को अमर उजाला संवाददाता ने जब शहर की करीब एक दर्जन स्कूली बसों का जायजा लिया तो महज एक बस में ही महिला कंडक्टर दिखाई दी।
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वहीं कई जगह पूरी बस में महज एक ही छात्रा थी और वो भी पुरुष ड्राइवर और कंडक्टर के भरोसे। ये किसी भी शख्स पर सीधे तौर पर आरोप नहीं लेकिन ये सच है कि ऐसे हालात में स्कूली बसों में बेटियों की सुरक्षा की गारंटी लेना बेहद कठिन है। एक
जानकारी के अनुसार स्कूली बसों में देशभर में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की मुहिम के बीच कुछ एक ऐसे वाक्ये सामने आए हैं जिसमें स्कूली बसों में ड्राइवर या कंडक्टर ने छात्रा के साथ बद्तमीजी की। इन घटनाओं के बाद प्रदेश सरकार की ओर से ये आदेश दिए गए थे कि स्कूली बसों में कंडक्टर के तौर पर महिलाकर्मी की तैनाती भी की जाए। आदेश के बावजूद भी अधिकांश स्कूली बस संचालक इस बेहद जरूरी आदेश की पालना नहीं कर रहे।
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मेडिकल किट के नाम पर कहीं पट्टी तो कहीं डेटॉल
प्रशासन ने हर स्कूली बस में मेडिकिट यानी फर्स्ट एड बॉक्स को कंपलसरी किया था। इसके बाद लगभग हर बस में मेडिकिट तो मिला लेकिन अधिकांश में फर्स्ट एड बॉक्स के नाम पर खानापूर्ति की हुई थी। कहीं महज थोड़ी सी रुई के साथ डेटॉल था, मरहम और दवाई गायब। किसी में मरहम और पट्टी थी तो साफ करने के लिए डेटॉल और दवाई नहीं। किसी-किसी कंडक्टर को फर्स्ट एड बॉक्स के बारे में पता ही नहीं था।

बिना लाइसेंस, कागज के सड़कों पर दौड़ा रहे वाहन
शहर के नाईवाली चौक के अलावा विभिन्न अन्य स्थानों पर स्कूली बसों की चेकिंग ली गई तो एक और हैरानी भरी बात सामने आई। अधिकांश स्कूली बसों के ड्राइवर्स के पास उनके लाइसेंस नहीं थे। इसके अलावा कुछ एक मामले तो ऐसे भी सामने आए जिनमें गाड़ी के कागज भी नहीं थे। यही नहीं दर्जन भर से ज्यादा बस चेक करने के बावजूद एक या दो ड्राइवर और कंडक्टर ही बावर्दी दिखाई दिये। चालकों का कहना था कि वर्दी न होने की स्थिति में चालान कटता है,जिसका हर्जाना स्कूल संचालक भुगत लेते हैं।

सीसीटीवी हर बस में, प्रेशर गेट कहीं-कहीं
शनिवार को अमर उजाला संवाददाता ने जिन-जिन स्कूली बसों को देखा, उन सबमें ही सीसीटीवी कैमरे दिखाई दिये। हालांकि प्रेशर गेट की बात करें तो प्रशासन के कई बार आदेश देने के बावजूद ये गेट कुछ ही बसों में दिखाई दिये। बस चालकों से इस बारे में पूछा तो वे बोले कि नई स्कूली बसों में ही प्रेशर गेट लगे हैं पुरानी में नहीं। ये हाल तब हैं जब करीब महीने भर पहले ही में प्रेशर गेट और कंडक्टर न होने की वजह से ही एक विद्यार्थी की जान चली गई थी।

प्राइवेट स्कूली वैन की हालत सबसे ज्यादा खराब
निजी स्कूलों की या स्कूलों से अटैच्ड स्कूली वैन्स को चेक किया तो हालात और भी बुरे थे। एक निजी स्कूल से अटैच्ड वैन पर न तो कहीं स्कूली वैन के लिए बने मानकों का पीला कलर था और न ही कहीं स्कूली वैन लिखा था। यही नहीं वैन चालक फोन पर बात करते हुए गाड़ी चला रहा था और वैन की विंड स्क्रीन भी टूटी हुई थी। वहीं एक अन्य वैन में स्कूली बच्चे बुरी तरह भरे हुए थे। ऐसे में समझा जा सकता है कि स्कूली बसों की स्थिति निजी स्कूलों में अटैच्ड वैन्स या स्कूली वैन्स की तुलना में बेहद खराब है। नाईवाली चौक पर तैनात ट्रैफिक प्रभारी अजीत सिंह बताते हैं कि स्कूली वैन्स में सीसीटीवी कैमरे भी बेहद कम लगे मिलते हैं।
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स्कूली बसों में करवाएंगे नियमों की पालना: एएसआई अजीत सिंह
स्कूली बसों के पिछले पांच महीनों में 90 चालान हुए हैं। समय-समय पर चेकिंग की जाती है। स्कूली बसों में नियमों की पालना जरूर कराई जाएगी।
-अमर सिंह, ट्रैफिक प्रभारी, नाईवाली चौक
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नियमों की पालना हर स्कूल से कराई जाएगी। समय-समय पर इनकी जांच की जाती है। स्कूल बसों में महिला कंडक्टर होना बहुत जरूरी है। इसके लिए बाकायदा गाइड लाइन भी जारी की हुई है। अगर ऐसा नहीं हो है तो हम कार्रवाई करेंगे।
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धर्मवीर बल्डोदिया, डीईओ, रेवाड़ी
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