ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक पेयजल पहुंचाने एवं पानी की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार की ओर से जल जीवन मिशन के तहत गांव में प्रत्येक घर में पेयजल पहुंचाने के लिए पंचायतों को भी पैसा खर्च करना पड़ेगा। योजना के अंतर्गत पंचायतों को प्रोजेक्ट के कुल बजट का दस प्रतिशत देना होगा। बजट नहीं देने पर गांव में प्रोजेक्ट शुरू नहीं होगा। इस बारे में जलापूर्ति विभाग मुख्यालय ने नोटिफिकेशन भी जारी किया हुआ है।
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर में पेयजल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन योजना शुरू की हुई है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक घर तक पेयजल पहुंचाया जाना है। योजना को सिरे चढ़ाने के लिए विभाग ने गांवों में सर्वे का कार्य शुरू किया हुआ है। सर्वे का कार्य सक्षम युवाओं से करवाया जा रहा है। सक्षम युवा गांवों में प्रत्येक घर में जाकर पेयजल कनेक्शन की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। कनेक्शनों के साथ-साथ यह भी डाटा तैयार किया जा रहा है कि गांव की किस गली में पेयजल पाइप लाइन नहीं दबी है। विभाग द्वारा गांवों में नए जलघर, नई पेयजल पाइप लाइनें और नए कनेक्शन जारी किए जाने हैं। सर्वे का कार्य पूर्ण होने पर विभाग द्वारा गांव में खर्च किए जाने वाले बजट का एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। तैयार एस्टीमेट की दस प्रतिशत राशि पंचायत को देनी होगी। शेष बची हुई राशि का बजट राज्य और केंद्र सरकार द्वारा जारी किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार गांवों में पेयजल पाइप लाइनें दबाने का कार्य पंचायत द्वारा बजट देने पर ही करवाया जाएगा।
किसी भी रूप में दे सकती हैं पंचायतें अपना 10 प्रतिशत अंश
जल जीवन मिशन के तहत पंचायतों को कुल बजट का दस प्रतिशत अंश देना अनिवार्य है। अधिकारियों के अनुसार पंचायतें अपना अंश नकदी के साथ-साथ दूसरे किसी भी रूप में दे सकती हैं। पंचायतें गांव में बनने वाले जलघर अथवा बुस्टिंग स्टेशन के लिए विभाग को अपने अंश की कीमत की जमीन उपलब्ध करवा सकती हैं।
गांवों में विभाग के 55 हजार पंजीकृत कनेक्शन
जलापूर्ति विभाग द्वारा शहर और गांवों में पेयजल सप्लाई दी जाती है। इसके लिए गांवों में जलघरों और ट्यूबवैलों की व्यवस्था की हुई है। गांवों में विभाग के करीब 55 हजार पंजीकृत उपभोक्ता हैं। इसके अतिरिक्त हजारों की संख्या में अवैध कनेक्शन भी लगे हुए हैं। अवैध कनेक्शनों के कारण पंजीकृत उपभोक्ताओं को पर्याप्त पेयजल नहीं मिलता है। विभाग के जल जीवन मिशन के तहत गांवों के सभी अवैध कनेक्शनों को नियमित किया जाना है।
पंचायतों के पास बजट की कमी बन सकती है बाधा
गांवों में जलघर एवं बुस्टिंग स्टेशन के निर्माण और नई पेयजल पाइप लाइनें दबाने का खर्च करोड़ों रूपए होता है। ऐसे में गांव के लिए जो भी एस्टीमेट बनेंगे, उनकी राशि करोड़ों रूपए में होगी। पंचायतों के पास इतना बजट नहीं होता है। ऐसे में पंचायतों के पास बजट की कमी गांव में प्रत्येक घर में पेयजल पहुंचाने में बाधा बन सकती हतै।
मुख्यालय के आदेशानुसार ही किया जाएगा कार्य
जल जीवन मिशन का उद्देश्य जल की बर्बादी को रोकना व गांव में प्रत्येक घर तक पेयजल पहुंचाना है। इसके लिए गांवों में कमेटियों का गठन कर सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही जिले में इस कार्य को सिरे चढ़ा दिया जाएगा।
पेशन कुमार, एक्सईएन, पंचायती राज विभाग, रेवाड़ी