जुलाई 2013 में दोस्त की पत्नी को बी-पॉजिटिव ग्रुप के रक्त की जरूरत थी। संयोग से मेरा रक्त समूह भी बी-पॉजिटिव है, इसलिए बिना झिझक मैंने रक्तदान किया। उस समय जो संतोष मिला, उसे बयां नहीं किया जा सकता। इसके बाद संकल्प लिया कि जब भी किसी जरूरतमंद को रक्त की जरूरत होगी, मैं रक्तदान जरूर करूंगा। इसके बाद से जरूरतमंद मरीजों को रक्तदान करता आ रहा हूं। अब तक 20 से अधिक बार रक्तदान कर चुका हूं। रक्तदान से कमजोरी नहीं आती। लोगों को रक्तदान करना चाहिए।-जितेश अग्रवाल (43), सेक्टर-3, रेवाड़ी।