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Rewari News: डॉक्टरों की पेन डाउन हड़ताल ने बढ़ाया मरीजों का दर्द

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सिविल अस्पताल में धरने पर बैठे चिकित्सक। संवाद - फोटो : रामलला के दर्शन करने जाते श्रद्धालु गण।
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रेवाड़ी। सरकारी चिकित्सकों ने मांगों को लेकर सिविल अस्पताल में सुबह 9 से 11 बजे तक पेन डाउन हड़ताल की। इस दौरान ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद रखी गईं। यह कदम एचसीएमएसए की कार्यवाही समिति के आह्वान पर उठाया गया। चिकित्सकों ने कहा कि लंबे समय से मांगों पर सुनवाई नहीं होने के कारण वे मजबूर होकर आंदोलन पर उतरे।
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हड़ताल के दौरान इमरजेंसी, लेबर रूम और एनआईसीयू को छोड़कर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी पूरी तरह बंद रही।
नागरिक अस्पताल में मरीज ओपीडी काउंटर के बाहर प्रतीक्षा में बैठे रहे और कई मरीजों को बिना परामर्श लौटना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों के लिए इंतजार और परेशानी ज्यादा रही। कुछ मरीजों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार और डॉक्टरों का विवाद मरीजों की जान की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
जिले में रोजाना करीब 1800 मरीज ओपीडी में आते हैं। हड़ताल खत्म होने के बाद अचानक भीड़ बढ़ने से अस्पतालों में अफरा-तफरी जैसे हालात बन गए और मरीजों को इलाज के लिए और इंतजार करना पड़ा। इस दौरान बुजुर्ग लोगों को भी काफी परेशान झेलनी पड़ी।
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सीधी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) भर्ती शुरू करने पर जताया विरोध
चिकित्सकों ने सबसे अधिक विरोध सीधी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) भर्ती शुरू करने पर जताया। अध्यक्ष डॉ. सुधा और महासचिव डॉ. वंदना मलिक ने बताया कि लंबे समय से संघर्ष चल रहा है और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी भर्ती रोकने के स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं। चिकित्सकों ने आरोप लगाया कि सर्विस नियमों में संशोधन होने और आश्वासन दिए जाने के बावजूद सरकार ने एक बार फिर सीधी एसएमओ भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 30 नवंबर को एचसीएमएसए की कार्यवाही समिति की बैठक होगी जिसमें सरकार की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे के आंदोलन पर फैसला लिया जाएगा।
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संशोधित एसीपी संरचना की अधिसूचना जारी न होने को लेकर भी नाराजगी जताई

वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. दीपक वर्मा, डॉ. मनीष यादव, डॉ. सचिन शर्मा, डॉ. विद्या सागर और डॉ. अभिषेक ने संशोधित एसीपी संरचना की अधिसूचना जारी न होने को लेकर भी नाराजगी जताई। प्रस्ताव मुख्यमंत्री और वित्त विभाग स्तर पर मंजूर होने के बावजूद एक साल से अधर में पड़ा हुआ है। चिकित्सकों का कहना है कि विशेषज्ञों को रोकने और आकर्षित करने के लिए वैकल्पिक एनपीए, आयुष्मान प्रोत्साहन और विशेषज्ञ प्रोत्साहन जैसे विकल्प भी लागू किए जा सकते हैं लेकिन सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठा रही। इसम मौके पर राज्यस्तरीय निकाय के महासचिव डॉ. अनिल यादव भी प्रदर्शन में शामिल रहे। आगे कहा कि हड़ताल केवल सांकेतिक थी। इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह चालू रहीं और हड़ताल समाप्त होने के बाद ओपीडी समय से अधिक रुककर मरीजों को देखा गया ताकि किसी भी मरीज को परेशानी न हो।


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बावल में भी ओपीडी सेवा बाधित रही

बावल। बावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पेन डाउन हड़ताल की जिससे ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं। हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रहीं ताकि गंभीर मरीजों को कोई परेशानी न हो। हड़ताल के कारण सुबह अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा, पर्ची कट रही थी लेकिन चिकित्सक अनुपस्थित रहे।
लोग रहे काफी परेशान
राजेंद्र यादव ने बताया कि उसे काफी दिनों से बुखार है, वह इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में सुबह 9 बजे पहुंच गया था। पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर हैं। अनिता ने बताया कि वह अपनी मां के इलाज के लिए अस्पताल आई थीं, चिकित्सक हड़ताल पर बैठने के कारण काफी समस्या हुई। विरेंद्र ने बताया कि वह ग्रामीण क्षेत्र से आया था, पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर हैं, काफी दिक्कत हुई।

सिविल अस्पताल में धरने पर बैठे चिकित्सक। संवाद- फोटो : रामलला के दर्शन करने जाते श्रद्धालु गण।

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