संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर वीरवार को हड़ताल पर रहे। ओपीडी में बीएएमएस, रिटायर्ड और प्रशिक्षु चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई थी। ऐसे में ओपीडी में डाक्टरों ने मरीजों की जांच की लेकिन ऑपरेशन का कार्य पूरी तरह ठप हो गया। ऑपरेशन टाल दिए गए।
रोजाना सिविल अस्पताल में हड्डी, जनरल सर्जरी, कान और नाक, पेट की पूरे जिले में 30 से अधिक ऑपरेशन होते थे। सिविल अस्पताल में हड्डी, जनरल सर्जरी, कान और नाक के ऑपरेशन नहीं हुए। हड़ताल की वजह से जिले में ओपीडी प्रभावित हुई है। जिले में 150 से अधिक सरकारी चिकित्सक कार्यरत हैं। इसमें 50 से अधिक चिकित्सक तो सिविल अस्पताल में ही हैं। चिकित्सकों की हड़ताल की सूचना से कम मरीज पहुंचे थे। स्वास्थ्य विभाग ने ओपीडी में बीएएमएस, रिटायर्ड चिकित्सक और ट्रेनिंग स्टूडेंट की ड्यूटी लगाई हुई थी। ओपीडी के लिए पर्ची काउंटर खुला हुआ था। सीएमओ सुरेंद्र यादव ने खुद शिशु रोग विशेषज्ञ की ओपीडी संभाली और यहां पर आए मरीजों को देखा।
सुनील, राजेश, अनीता ने बताया कि वह इलाज कराने के लिए सिविल अस्पताल में आई थी। मालूम चला कि चिकित्सक हड़ताल पर हैं। अनीता का कहना है कि वह ग्रामीण क्षेत्र से यहां पर आई थी। काफी परेशानी हुई।
एक करोड़ की वर्तमान बांड राशि, वित्तीय बोझ : चिकित्सकों के मुताबिक स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए एक करोड़ की वर्तमान बांड राशि और उससे जुड़ी शर्तें डॉक्टर पर वित्तीय बोझ डालती हैं। मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से विकलांग डाक्टरों के लिए पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बिना किसी बंधक आवश्यकता के बांड राशि को घटाकर 50 लाख करनी चाहिए। विशेषज्ञ कैडर की अनुपस्थिति, गतिशील एसीपी संरचना की कमी, एसीपी कार्यान्वयन में अनियमितताएं, चिकित्सा अधिकारियों के लिए सीमित और गैर-समयबद्ध पदोन्नति के रास्ते, और अत्यधिक उच्च पीजी पालिसी बांड राशि प्राथमिक कारण हैं जिनके कारण कई एचसीएमएस डाक्टर जल्दी बाहर निकलने का विकल्प चुनते हैं।