दूसरे बच्चे के जन्म की तैयारियों में परिवार के लोग महीनों से लगे थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि नागरिक अस्पताल के गायनी विभाग की लापरवाही आने वाले मेहमान के साथ आने वाली बेशुमार खुशियां मातम में बदल जाएंगी। कारण, शहर के उत्तम नगर की गर्भवती महिला का नागरिक अस्पताल में दो-दो बार चेकअप किया गया और सब ठीक बताकर टरका दिया।
बुधवार को दोबारा गर्भवती महिला परिजनों के साथ पहुंची तो इंसानियत को शर्मसार करते हुए डॉक्टर ने दिल की धड़कन बंद होने की बात कही और सात दिन बाद अल्ट्रासाउंड करने की बात कहते हुए बाहर से अल्ट्रासाउंड होने की बात कहते हुए टरका दिया। निजी अस्पताल में चेक कराया तो पता चला कि बच्चा गर्भ में सात दिन पहले ही एक्सपायर हो चुका है, यही नहीं शव सड़ने के चलते जच्चा को भी इंफेक्शन हो गया और अब वह निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।
यह है पूरा दर्द भरा मामला
आलम अपनी पत्नी के साथ सालों से दिल्ली रोड स्थित उत्तम नगर में रहता है। आलम आर्थिक रूप से कमजोर नहीं है। आलम ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं अन्य लोगों के कहने पर शहर के नागरिक अस्पताल में गर्भवती पत्नी को गर्भ पीड़ा होने पर रात के समय नागरिक अस्पताल पहुंचता है। यहां पर डॉक्टर उसे इंजेक्शन लगाने के बाद छह जून को आने के लिए कहते हैं। इस दिन डॉक्टर गर्भवती की जांच करते हैं और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वास्थ्य ठीक बताकर घर भेज देते हैं। आलम ने बताया कि पत्नी डॉक्टरों को बच्चे में मूवमेंट नहीं होने की बात कहती है, लेकिन डॉक्टर ठीक होने की बात कहकर उसे आठ तारीख को अस्पताल आने की कहते हैं। आलम ने बताया कि उसकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन डॉक्टर के विश्वास के कारण वह कहीं और लेकर नहीं गया। जैसे ही आठ जून को वह सुबह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टरों ने तत्परता नहीं दिखाई तथा पत्नी को डेढ़ बजे चैक किया। आलम ने कहा कि डॉक्टर ने चैक करते ही कहा कि बच्चे की धड़कन नहीं मिल रही है। अल्ट्रासाउंड में यहां तो सात दिन लगेंगे इसलिए इसे बाहर ले जाओ।
शाम चार बजे तक होते हैं नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड
अस्पताल प्रशासन की मानें तो अल्ट्रासाउंड करने के लिए तीन डॉक्टरों को नियुक्त किया गया है, जो कि सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक तीन शिफ्ट में अल्ट्रासाउंड करते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए आपात स्थित में तुरंत अल्ट्रासाउंड किया जाता है। अन्य मरीजों को बीमारी की गंभीरता के अनुसार समय दे दिया जाता है लेकिन गायनी विभाग की महिला डॉक्टर द्वारा दोपहर डेढ़ बजे ही गर्भवती को बाहर जाने के लिए कह दिया जाना बड़े सवाल खड़े करता है।
इससे पहले भी लापरवाही के मामले आ चुके है सामने
नागरिक अस्पताल में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अपने कारनामों से गायनी विभाग चर्चा में रहा है। एक महिला के आप्रेशन के दौरान गड़बडी के बाद नवजात सहित बच्चे की रोहतक के लिए रेफर करने के मामले मे भी महिला की मौत हो गई थी, जिसमें नागरिक अस्पताल पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद डिलीवरी के लिए आई महिला की जांच के बाद उसे घूमने के लिए बाहर भेज दिए जाने के बाद गर्भवती ने खड़े-खड़े ही बच्चे को जन्म दे दिया था। इस मामले में भी डॉक्टरों की खूब फजीहत हुई थी। इतना ही नहीं एक गर्भवती की मौत के बाद तो परिजनों ने अस्पताल के गेट पर शव रखकर प्रदर्शन किया था।
अपनी जांच में डॉक्टरों को मिल जाती है क्लीन चिट
डॉक्टरों की लापरवाही से लोगों की जान तक चली जाती है। लोगों की ओर से प्रदर्शन भी किए जाते हैं, बावजूद इसके आरोपी डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। आरोपों के बाद नागरिक अस्पताल की ओर से जांच कमेटी गठित की जाती है। महीनों बाद की खाना-पूर्ति जांच में डॉक्टर को क्लीन चिट दे दी जाती है।
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वर्जन-
रूटीन चैकअप के बाद शिशु की गर्भ में मौत गंभीर बात है। गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड तुरंत किए जाते हैं। पूरे मामले की जांच की जाएगी।
- डॉ. सुदर्शन पंवार, अस्पताल अधीक्षक