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सड़कों पर गोवंश नजर न आए, गोवन बनाएं अधिकारी : श्रवण कुमार

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रेवाड़ी। गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्रवण कुमार गर्ग ने लघु सचिवालय सभागार में जिले की विभिन्न गोशालाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर गोशालाओं की समस्याओं व मांगों को सुना। इस दौरान उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयासरत है। कोई भी गोवंश सड़क पर न घूमे, इसके लिए व्यापक प्रबंध करने के लिए प्रयासरत है।
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उन्होंने बताया कि हरियाणा में इन दिनों 624 पंजीकृत गोशालाओं में 4.24 लाख गोधन को आश्रय मिला हुआ है। मुख्यमंत्री ने गोसेवा आयोग की अनुशंसा पर बीते 9 माह के दौरान गोशालाओं में गोधन की सेवा के लिए तीन किस्तों में 45 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी है। आयोग की ओर से गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नस्ल सुधार, स्पेसिफिक सीमन, सोलर प्लांट, दो रुपये प्रति यूनिट बिजली उपलब्ध कराने, पंच गव्य से तैयार होने वाले उत्पादों के लिए रिसर्च को बढ़ावा देने, डीएपी का विकल्प जैविक उर्वरक, पेंट, अर्क, धूप, घी, पॉलीथिन के विकल्प के तौर पर पौधों के लिए गमले तैयार करने आदि कार्य किए गए हैं।
एडीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने गो सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग को बताया कि जिले में 14 गोशालाएं रजिस्टर्ड हैं। जिनमें 5400 गोवंश रजिस्टर्ड है, जिन्हें वैक्सीनेशन किया जा चुका है। उन्होंने लंपी स्किन डिसीज के बारे में जिले में अपनाई गई प्रक्रिया की पूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि दूसरे प्रदेशों से आने वाले गोवंशों को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन पूर्ण रूप से मुस्तैदी से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि बेसहारा गोवंश को सडक़ो से हटाने के लिए भी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने अध्यक्ष को आश्वत करते हुए कहा कि जो भी बैठक में दिशानिर्देश दिए गए है उनकी पूर्ण रूप से पालना की जाएगी।
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बैठक में वाईस चेयरमैन पूर्णमल यादव, जिला प्रभारी प्रमोद बंसल, डीडीपीओ एचपी बंसल, डीएसपी अमित भाटिया, उप-निदेशक पशुपालन भूप सिंह, एसडीओ पशु पालन डॉ विनोद यादव, डॉ अनिता यादव, गौरव कुमार, विरेंद्र सिंघानिया, विजयपाल, प्रदीप कुमार के अतिरिक्त जिले की विभिन्न गोशाला समिति के सदस्यगण भी उपस्थित रहे।
‘लंपी चर्म रोग वायरस के नियंत्रण के लिए किया सराहनीय कार्य’
श्रवण कुमार गर्ग ने कहा कि जिले में लंपी चर्म रोग वायरस के नियंत्रण के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सहयोग से गोशाला समिति के प्रतिनिधियों व गोवंश प्रेमियों ने सराहनीय कार्य किया है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र है। इसके कारण टीकाकरण का कार्य तेजी से पूरा कर इस बीमारी की रोकथाम की है। उन्होंने कहा कि जिले में 412 गांव हैं और 16 गोशालाएं हैं। यदि 4 से 5 गांव आपस में मिलकर एक गोशाला बना लें तो कोई भी गोवंश सड़क पर नजर नहीं आएगा।
गायों के दूध, गोबर, गोमूत्र की बिक्री के बारे में दी जानकारी
अध्यक्ष ने कहा कि इस क्षेत्र में बाजरे की अच्छी फसल है और बाजरे की कटाई के बाद गोशाला समिति के लोग बाजरे की कडबी का स्टॉक कर लें। उन्होंने गोशालाओं में रहने वाली गायों के दूध, गोबर, गोमूत्र इत्यादि की बिक्री के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यदि यह पूरी प्रक्रिया ठीक से चलाई जाए तो गोशालाओं को चलाने में काफी मदद मिलती है।
‘गोवंश हटाने के लिए स्थान चिह्नित किया जाए’
उन्होंने कहा कि सड़क से गोवंश हटाने के लिए जिले में कोई स्थान चिह्नित किया जाए और समाजसेवी लोगों को साथ जोड़कर इसकी व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि दूसरे प्रदेशों से आने वाले गोवंशों को रोकने के लिए पुलिस विभाग पूरी सख्ती के साथ अपना कार्य करें। उन्होंने उप-निदेशक पशुपालन को निर्देश दिए कि काउ टास्क फोर्स की बैठक प्रत्येक माह सुनिश्चित की जाएं और उसकी कार्यवाही गोसेवा आयोग को भिजवाई जाएं।
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