भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाने वाला दीपोत्सव दीपावली पर इंद्र-कुबेर सहित महालक्ष्मी का पूजन आज शाम 5:26 से लेकर 6:26 तक करीब एक घंटा किया जायेगा। हालांकि परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष दीपावली पर पटाखे चलाकर उत्सव को मनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार कोरोनाकाल व पहले से ही रिकॉर्ड तोड प्रदूषण के चलते लोगों के हित में पटाखों की बिक्री व चलाने पर नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों के तहत प्रतिबंध रहेगा। सरकारी की ओर से दो घंटे पटाखे चलाने के आदशों का रेवाड़ी सहित हरियाणा के एनसीआर जिलों में इसकी छूट नहीं रहेगी। अर्थात इस बार पटाखों से सेहत का नुकसान की बजाय एक दूसरे को खुशियां बांटकर दीपावली उत्सव मनाया जाना है। एनजीटी का यह प्रतिबंध 30 नवंबर तक रहेगा। वहीं, बाजारों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने धारा-144 लगाते हुए सभी बाजारों में सुबह 10 से लेकर शाम 6 बजे तक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसकी निगरानी का जिम्मा डीएसपी को दिया गया है।
पटाखा लाइसेंस धारकों के प्रशासन ने लाइसेंस किये निरस्त
जिलाधीश यशेंद्र सिंह ने एनजीटी के निर्देशों के बाद जिले में पटाखों के भंडारण व बेचने वाले मात्र तीन लाइसेंस धारकों के लाइसेंस भी अस्थाई रूप से रद्द कर दिये हैं। अर्थात ये तीनों लाइसेंस धारक 30 नवंबर तक पटाखों का भंडारण व बिक्री नहीं कर सकेंगे। बता दें शहर के सदर बाजार, गुडियानी व मंदौला में तीन ऐसे लोगों हैं जिनके पास लाइसेंस हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि अन्य लोग जो पटाखे बेच रहे हैं, वह अवैध रूप से कारोबार कर रहे हैं। इनके खिलाफ विस्फोट अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है।
रेवाड़ी-बावल व कोसली में बनाई गई निरीक्षण टीम
जिलाधीश ने पटाखों की रोकथाम के लिए रेवाड़ी, कोसली व बावल में अधिकारियों की निगरानी टीम गठित की है। टीमों में उप-मंडल अधिकारी, डीएसपी व अगिनशमन अधिकारी मौजूद रहेंगे। ऐसे में लोगों को इस बार अपनी व अपने परिवार की सेहत के लिए पटाखों के बिना ही दीपावली, गोवर्धन पूजा व भैयादूज मनानी होगी।
दीपावली मुहूर्त...
दीपावली का शुभ मुहूर्त और महालक्ष्मी पूजन शाम 05:25 से 06:26 तक और प्रदोष काल 05:23 से 08:04 तक रहेगा। महानिशीथ काल रात्रि 11:40 से मध्यरात्रि 12:32 तक रहेगा। प्रदोष काल आरंभ होने से पूर्व घर में वातावरण शुद्धि के लिए जल छिड़काव करें और मुख्य द्वार पर रंगोली और दीयों की शृंखला बनाएं। इसके अलावा पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल वस्त्र पर गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें अथवा मां लक्ष्मी का गणेश सहित चित्र दीवार पर लगाएं। घृत दीप जलाकर माता लक्ष्मी और गणेश को तिलक लगाएं। चावल के अक्षत फल-फूल, गुड़, हल्दी मिश्री, बर्फी मिष्ठान अर्पित करें। इस समय पितरों के निमित्त भी एक दीप जलाकर पितरों का स्मरण करना विहित है।
- पंडित अजय शास्त्री
15 नवंबर को अन्नकूट
कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा होती है। यह गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत को समर्पित है इस दिन गायों की पूजा की जाती है। इसे अन्नकूट उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर भगवान इंद्र का मान मर्दन कर ब्रज वासियों की रक्षा की थी। उस दिन से इस त्योहार को मनाया जाता है।
16 नवंबर को भैया दूज
कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को मान्यता के अनुसार यमी ने अपने भाई को बुलाकर तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना करती हैं व भोजन कराती हैं। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए पटाखों की बिक्री व चलाने पर पूर्णत प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे में लोग पटाखे चलाने की बजाय एक दूसरे को खुशियां बांटने का काम करें। हम सभी को साथ मिलकर पर्यावरण व अपने स्वास्थ्य के लिए पटाखों के बगैर ही दीपावली उत्सव मनाना है। उम्मीद करता हूं कि सभी जिलावासी इस मुहिम का हिस्सा बनकर खुशी के साथ दीपावली मनाएंगे।
- यशेंद्र सिंह, डीसी रेवाड़ी