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Rewari News: रेलवे नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

Sat, 13 Jun 2026 11:07 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन। संवाद
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रेवाड़ी। रेलवे क्षेत्र में अवैध प्रवेश, बिना अनुमति खाद्य सामग्री बेचना, नो-पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करने, महिला कोच में यात्रा करने, चेन पुलिंग आदि मामलों में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जोगिंद्री की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपियों को दोष सिद्ध करते हुए उनके ऊपर जुर्माना लगाया है।
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रेलवे सुरक्षा बल ने रेलवे अधिनियम के उल्लंघन के मामलों में एफआईआर दर्ज किए थे। इन मामलों की सुनवाई मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जोगिंद्री की अदालत में हुई।
अदालत ने रेलवे क्षेत्र में अवैध प्रवेश और उपद्रव करने के मामले में लंबा निवासी योगेश कुमार को दोषी ठहराया। रेलवे सुरक्षा बल ने रेलवे स्टेशन रेवाड़ी क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश कर उपद्रव करते उसे पकड़ा था। आरोपी ने अदालत में दोष स्वीकार कर लिया। अदालत ने आरोपी पर 500 रुपये जुर्माना लगाया। आरोपी ने जुर्माना जमा कर दिया।
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अदालत ने रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत शिव कॉलोनी निवासी मदन लाल को दोषी ठहराया। आरोप था कि 4 मार्च को रेलवे स्टेशन रेवाड़ी क्षेत्र में उसने ट्रेन संख्या 05023 की चेन पुलिस की थी। अदालत में आरोपी ने अपना दोष स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा करने के बाद रिहा कर दिया गया।
अदालत ने बंजारवाड़ा निवासी बलदेव राज को रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत दोषी ठहराया। 6 मई को बलदेव रेलवे स्टेशन रेवाड़ी क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करते पाया गया था। अदालत में उसने दोष स्वीकार कर लिया। अदालत ने उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जिसे उसने जमा कर दिया। दोषी को रिहा कर दिया गया।
अदालत ने भिठवान निवासी सचिन कुमार को रेलवे अधिनियम की धारा 154, 147 व 174 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि 11 अक्तूबर 2025 को उसने रेलवे क्षेत्र में अवैध प्रवेश कर ट्रेन संचालन में बाधा उत्पन्न की थी। सचिन ने अदालत में दोष स्वीकार कर लिया। अदालत ने कुल 3500 रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना जमा होने पर उसे रिहा कर दिया गया।
चैनपुरा छोटा निवासी रविंद्र सिंह को रेलवे अधिनियम की धारा 162 के तहत दोषी ठहराया गया। 6 जून को वह ट्रेन संख्या 20984 के महिला आरक्षित कोच में यात्रा करते हुए पकड़ा गया था। रविंद्र ने अदालत में दोष स्वीकार कर लिया। अदालत ने उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया तथा जुर्माना अदा करने पर उसे रिहा कर दिया गया।
अदालत ने जतियाना निवासी गोविंद को रेलवे अधिनियम की धारा 162 के तहत दोषी करार दिया। आरोप था कि 6 जून 2026 को वह ट्रेन संख्या 20984 के महिला कोच में यात्रा कर रहा था। अदालत में दोष स्वीकार करने पर उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना जमा करने के बाद उसे रिहा कर दिया गया।
अदालत ने गांव दलियाकी निवासी जेहान को रेलवे अधिनियम की धारा 159 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि 9 जून 2026 को उसने रेलवे स्टेशन रेवाड़ी क्षेत्र में नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़ा कर रेलवे कर्मचारी के निर्देशों की अवहेलना की। आरोपी ने अदालत में दोष स्वीकार किया। इसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए जुर्माना लगाया।
अदालत ने आलमपुर निवासी मोहित को रेलवे अधिनियम की धारा 144 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि 4 सितंबर 2025 को वह रेलवे स्टेशन रेवाड़ी के प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर बिना लाइसेंस खाद्य सामग्री बेचता पाया गया था। अदालत में आरोपी ने दोष स्वीकार कर लिया।

चेन पुलिंग मामले में लगाया जुर्माना

अदालत ने मेवसावनकट निवासी गया प्रसाद को रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि 28 अप्रैल 2026 को उसने ट्रेन संख्या 09636 की चेन बिना उचित कारण खींची थी। आरोपी ने अदालत में दोष स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए जुर्माना लगाया।
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बिना लाइसेंस खाद्य सामग्री बेचने पर दोषी

अदालत ने रेलवे अधिनियम की धारा 144 के तहत आलमपुर निवासी मोहित को दोषी ठहराया। रेलवे सुरक्षा बल की शिकायत के अनुसार 4 सितंबर 2025 को मोहित रेलवे स्टेशन रेवाड़ी के प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर रेलवे से लाइसेंस लिए बिना खाद्य सामग्री बेचता हुआ पाया गया था। अदालत में आरोप समझाए जाने पर मोहित ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए सजा निर्धारण के लिए मामला निर्धारित किया।
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नो-पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करने पर नितिन दोषी

अदालत ने रेलवे अधिनियम की धारा 159 के तहत भाड़ावास निवासी नितिन को दोषी ठहराया। आरपीएफ के अनुसार 9 जून 2026 को नितिन ने रेलवे स्टेशन रेवाड़ी परिसर में वाहन नो-पार्किंग क्षेत्र में खड़ा कर रेलवे कर्मचारी के निर्देशों की अवहेलना की थी। अदालत में आरोपी ने आरोप स्वीकार कर लिया। अदालत ने दोष स्वीकारोक्ति को स्वेच्छिक मानते हुए उसे दोषी करार दिया और सजा पर सुनवाई के लिए मामला निर्धारित किया।
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