रेवाड़ी। शहर में विकास के नाम पर खोदे गए गड्ढे मानसून में जान पर आफत बन रहे हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार एजेंसियों को शायद लोगों के जीवन की परवाह नहीं है। इस गड्ढों से मानसून के सीजन में बारिश होने पर हादसे होने का अंदेशा भी है।
शहर के झज्जर चौक, सर्कुलर रोड, झज्जर रोड, धारूहेड़ा चुंगी सहित मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों में घरेलू गैस पाइपलाइन के नाम पर जगह-जगह से सड़क की खुदाई कर छोड़ दी गई है। खानापूर्ति के नाम पर ऊपर से मिट्टी भी डाल दी गई, लेकिन मानसून की दो दिन हुई बारिश में मिट्टी बह गई और गड्ढे लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गए। कुछ लोगों ने बारिश में इन गड्ढों से होने वाले हादसों से लोगों को बचाने के लिए अवरोधक भी खड़े कर दिए हैं। वहीं कुछ स्थानों पर सड़क भी तोड़ी गई, इसको भी दोबारा नहीं बनाया गया।
एजेंसी नगर परिषद के पास कराती है पैसे जमा
बीते पांच साल से शहर की प्रत्येक कॉलोनी के घरों की रसोई में सीधे घरेलू गैस पीएनजी की सप्लाई के लिए सड़क खोदकर पाइपलाइन डाली जा रही है। नियमानुसार सड़क खुदाई के बाद निर्माण के लिए एजेंसी को एमसी क्षेत्र में नगर परिषद व सेक्टरों में हुडा के पास राशि जमा करानी होती है। एजेंसी अपना काम कर खानापूर्ति के लिए गड्ढों पर मिट्टी डालकर चलती बनती है। लेकिन नगर परिषद की ओर से दोबारा गड्ढों को ठीक से भरकर सड़क निर्माण नहीं कराया जाता है। इसके चलते ही इन गड्ढों में बारिश के दौरान हादसों की संख्या बढ़ जाती है।
सीवर के खुले व टूटे ढक्कनों से भी हादसों का डर
मौसम विभाग की ओर से 18 जुलाई से एक बार फिर से तेज बारिश की संभावना जताई गई है। शहर में जल निकासी ठीक नहीं होने के चलतेे दो-दो दिन तक सड़कों व गलियों में पानी खड़ा रहता है। शहर के 31 वार्ड में से अधिकतर में कई स्थानों पर सीवर के ढक्कन टूटने के चलते सीवर खुले पड़े हैं। बारिश के दौरान जलभराव के चलते इन खुले सीवर से बड़ा हादसा हो सकता है।
जन स्वास्थ्य विभाग के जेई दीपक यादव ने कहा कि जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी टूटे ढक्कनों को बदला जाता है। शिकायत नहीं मिलने के चलते कुछ जगह ऐसी हो सकती है। लोगों से अपील है कि कहीं पर सीवर के ढक्कन खुले हुए हैं तो जन स्वास्थ्य विभाग में शिकायत करें। 24 घंटे के अंदर समाधान किया जाएगा।
इधर, पालिका अभियंता अजय सिक्का ने कहा कि शहर में गैस पाइपलाइन डालने के बाद गड्ढे बनने की शिकायत बारिश के बाद मिली है। संबधित एजेंसी के अधिकारियों से भी बात की जाएगी, क्योंकि गड्ढों को ठीक से भरना उन्हीं की जिम्मेदारी थी। नप की ओर से भी इस तरह के सभी गड्ढों को भरवा दिया जाएगा।