रेवाड़ी। शहर के कई हिस्सों में गंदे पानी की सप्लाई की शिकायतें लगातार जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को आती रहती हैं। वहीं, जब जनस्वास्थ्य विभाग की टीम ने इन शिकायतों के समाधान के लिए जमीन स्तर पर जाकर जांच की तो कई खुलासे हुए हैं। विभाग की टीम द्वारा 15 से अधिक क्षेत्र की जांच में पाया गया है कि लोगों के घरों के पानी कनेक्शन के पाइप गंदी नालियों के बीच से होते हुए लगे हुए हैं, जहां से नालियों का गंदा पानी पाइपलाइन के माध्यम से घरों में जा रहा है।
इसका दूसरा बड़ा कारण यह भी है कि घरों के पुराने हो चुके क्षतिग्रस्त नल कनेक्शन लोगों द्वारा ऐसे ही खुले छोड़ दिए जाते हैं जहां से गंदा पानी पाइपलाइन में मिल जाता है। यह समस्या बल्लूवाड़ा, स्वामीवाड़ा, पुरानी तहसील गुड्डू आटा चक्की वाली गली, शुक्रपूरा, खासापुरा, चौधरी वाड़ा बारा हजारी, नई बस्ती, मोती चौक, भीम बस्ती, पंजाबी मार्केट व पुरानी शहर के कुछ हिस्से में अधिक देखी गई है। इन क्षेत्रों के लोग गंदे पानी की सप्लाई से परेशान रहते हैं। वहीं, विभाग के शहर में 35 हजार से अधिक रजिस्टर्ड उपभोक्ता हैं। इसके अलावा कई नई कॉलोनियों में भी काफी कनेक्शन किए जा चुके हैं, जो बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। विभाग की ओर से इन कनेक्शनों को भी नियमित किया जा रहा है।
शहर की करीब 3 लाख की आबादी, नहरी पानी पर निर्भर
बता दें कि शहर की करीब 3 लाख की आबादी है।
शहर में पेयजल की आपूर्ति नहरी पानी पर निर्भर है। नहरी पानी का शेड्यूल 16-24 का है। यानी 16 दिन नहर में पानी आता है और 24 दिनों तक बंद रहता है। लोगों को सप्लाई के दौरान जब गंदा पानी आता है तो ज्यादातर समय साफ पानी आने इंतजार में ही बीत जाता है। अब जब विभाग ने कनेक्शन में ही कमी बताई है तो लोगों के लिए भी यह काफी बड़ी समस्या बन चुकी है।
गंदे कनेक्शन की सूचना तुरंत विभाग को दें
मामले में विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या से तभी बचा जा सकता है जब पानी का कनेक्शन केवल अधिकृत प्लंबर द्वारा ही करवाया जाए। क्योंकि जो अधिकृत प्लंबर होता है उसे इसकी जानकारी होती है। बाकी प्लंबर कई बार खानापूर्ति कर चले जाते हैं, जिसका खामियाजा बाद में लोगों को भुगतना पड़ता है। अच्छी तरह से प्लग करवाकर बंद करा दें तथा सीवर के चेंबर में से पानी का पाइप ना लेकर जाएं। इसके अलावा किसी भी गंदे कनेक्शन की सूचना तुरंत विभाग को दें।
हर महीने रहती है पानी की समस्या
शहर में पेयजल की आपूर्ति के लिए कालाका में 5 और लिसाना में तीन वाटर टैंक बनाए गए हैं। इन टैंकों में नहरी पानी को स्टोर किया जाता है। यहां पर पानी को एकत्रित कर उसे बूस्टिंग स्टेशनों के माध्यम से कॉलोनियों में पानी की आपूर्ति की जाती है। कालाका में एक वाटर टैंक और बनाने की लंबे समय से मांग की जा रही है। जमीन नहीं मिलने के कारण वाटर टैंक का निर्माण नहीं हो पा रहा है। टैंक के लिए कम से 50 एकड़ जमीन की जरूरत है।
वर्जन:
शहर के कई हिस्सों में जाकर गंदे पानी की सप्लाई को लेकर जांच की गई तो मालूम चला है कि पानी कनेक्शन के पाइप गंदी नालियों के बीच से होते हुए लगे हुए हैं। साथ ही घरों के पुराने हो चुके क्षतिग्रस्त नल कनेक्शन लोगों द्वारा ऐसे ही खुले छोड़ दिए जाते हैं जहां से गंदा पानी पाइपलाइन में मिल जाता है। जिम्मेदारी को समझते हुए अपना पानी कनेक्शन केवल अधिकृत पलंबर द्वारा ही लगवाएं। पुराने कनेक्शन को अच्छी तरह से प्लग करवाकर बंद करा दें तथा सीवर के चेंबर में से पानी का पाइप ना लेकर जाएं।
-हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग रेवाड़ी।