खेत में भरा हुआ पानी। स्रोत : ग्रामीण
रेवाड़ी। पाल्हावास में लघु और बीपीएल किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब बरसाती पानी से भर चुके खेतों से जल निकासी के लिए पंचायत फंड से डीजल खर्च नहीं दिया जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता अनिल आर्य ने बताया कि हरियाणा राज्य आपदा प्रबंधन योजना के तहत पहले नहर यांत्रिक प्रभाग के पंप सेट पंचायत की देखरेख में चलाए जाते थे और डीजल खर्च पंचायत वहन करती थी लेकिन नए निर्देशों के अनुसार अब केवल रिहायशी क्षेत्र की जल निकासी पर पंचायत खर्चे पर होगी जबकि खेतों का तेल खर्च किसान स्वयं या नहर विभाग वहन करेगा।
अनिल आर्य ने बताया कि बड़े किसान तो किसी तरह समस्या का समाधान कर लेते हैं लेकिन लघु और बीपीएल किसानों के लिए यह नया नियम असहनीय साबित हो रहा है। जल निकासी में देरी से फसल देर से बोई जाती है, जिससे उत्पादन घट जाता है और ऊपर से हजारों रुपये का डीजल खर्च भी किसानों पर बोझ बन गया है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति उनके लिए भी विकट है, क्योंकि वह स्वयं एक बीपीएल लघु किसान हैं। आर्य ने मुख्यमंत्री, सिंचाई मंत्री, जिला प्रशासन, खंड कार्यालय और पंचायत को पत्र भेजकर चेताया है कि यदि इस निर्णय पर तत्काल संज्ञान नहीं लिया गया तो सरकार की किसानों के हित में बनी योजनाएं निष्प्रभावी हो जाएंगी और ग्रामीणों में आक्रोश पैदा होगा।