तापमान में हुई गिरावट के कारण शुक्रवार इस सीजन के अब तक के सबसे ठंडे दिनों में शुमार हो गया। वहीं दिन भर धूप नहीं निकलने और शीत लहर चलने से ठंड और बढ़ गई और लोग घरों में दुबके रहे।
मौसम में पहली बार अधिकतम तापमान 12 डिग्री पर आ गया। जबकि बृहस्पतिवार को ही तापमान करीब 20 डिग्री था। एक साथ आठ डिग्री गिरे तापमान से अब लोगों को सर्दी का अहसास हुआ।
दिन भर लोगों सर्दी से बचने के लिए घरों में दुबके रहे, वहीं उन्होंने अलावा का सहारा भी लिया गया। वहीं सर्दी बढ़ने से किसानों के चेहरे पर कुछ खुशी दिखी। जनवरी महीने के बावजूद गर्म दिन होने के चलते मौसम वैज्ञानिकों एवं किसानों में चिंता का सबब बना हुआ था।
ठंड नहीं पडने के कारण गेहूं की बढ़वार पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ रहा था। वहीं लंबी छुट्टी के बाद स्कूल पहुंचे बच्चे भी कड़ाके की ठंड पड़ने के कारण ठिठुरते रहे। इधर मौसम वैज्ञानिकों की माने तो अगले कुछ दिनों तक इस तरह का मौसम रहने की उम्मीद है। यदि ऐसा रहा तो फसलों को काफी फायदा होगा।
--------------------------
ओस की बूंदे के चलते घरों में दुबके लोग
जनवरी माह में भी पड़ रही गर्मी के चलते लोगों ने गर्म कपड़ों को घर पर रख दिया था। शुक्रवार सुबह जैसे ही लोग जगे तो धुंध व ओस की बूंदों की बरसात के साथ ठंडी हवाओं ने लोगों को एक बार फिर से घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर दिया। ठंड पड़ने के कारण लोगों ने छोटे बच्चों को घरों से बाहर नहीं निकालने में समझदारी समझी। वहीं स्कूली बच्चों को हाड़ कंपाती ठंड में भी स्कूल जाना पड़ा। वहीं पूरे दिन सूर्य देव के नहीं दिखने से लोगों को अलाव का सहारा लेकर अपने आपको गर्म करना पड़ा।
-------------------------
किसानों के चेहरों पर लौटी रौनक
मौसम में आए बदलाव से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। पिछले दिनों में अधिकतम तापमान केे कम नहीं होने के चलते गेहूं की फसल की बढ़वार पर भी रोक लग गई थी। जिससे मौसम वैज्ञानिक एवं किसान चिंतित नजर आ रहे थे। वहीं मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान था कि यदि ऐसा ही मौसम रहा तो गेहूं के उत्पाद में चालीस फीसदी तक की गिरावट हो सकती है। लेकिन अब मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि पंद्रह दिन भी ठंड पड़ जाए तो गेहूं की फसल के साथ सरसों की फसल की पैदावार में बढ़ोतरी हो सकती है।
-------------------------
वर्जन-
बादलों के चलते अधिकतम-न्यूनतम तापमान में भारी अंतर चल रहा है। अगले चार दिनों तक ऐसा मौसम ही रहने की उम्मीद है।
डॉ राज सिंह, मौसम वैज्ञानिक
-------------
ठंड कम पड़ने से इस बार फसलों में अधिक नुकसान हुआ है। जिसकी भरपाई तो नहीं हो सकती लेकिन सरकार किसानों को कुछ सहायता दे तो कुछ मदद जरूर हो सकती है। अब धुंध से फसल कुछ बच सकती है।
---- रामकिशन यादव, किसान
- पिछले वर्ष आधी जनवरी में तो कंपकंपा देने वाली ठंड का अहसास हो रहा था, जिससे फसल को भी काफी फायदा मिला लेकिन इस बार ठंड कम पड़ी है, जिससे फसलों में नुुकसान है।
- रिकूं यादव, किसान
- ठंड कम होने से फसलों में तो नुकसान हुआ है लेकिन आज की तरह अगर ठंड रही तो फसलों में कुछ सुधार हो सकता है। मौसम भी हर साल बदल रहा है।
-- श्रीभगवान यादव, किसान
- ठंड न होने के कारण सभी जगह खेती मेें नुकसान देखा गया है लेकिन आधी जनवरी बीत जाने के बाद भी इतनी ठंड नहीं हुई है। जिसका अनुमान नहीं लगाया था कि ठंड इतनी कम होगी। अगर आज की तरह ठंड रही तो फसलों में कुछ वृद्धि हो सकती है।
--धर्मबीर यादव, किसान