रेवाड़ी। शहर में कंजक खिलाते परिवार। संवाद
रेवाड़ी। रामनवमी में लोगों ने कन्याओं का पूजन किया। घर में भोजन कराया और आशीर्वाद लिया। इसी के साथ नवरात्र संपन्न हो गया।
शहर के विभिन्न मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की अंतिम दिन भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान लोगों ने मां से मन्नत मांग कर अपना व्रत खोला। आदर्श नगर स्थित मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया गया। पंडित वेद प्रकाश ने बताया कि नवरात्र का व्रत कन्या पूजन के बिना पूरा नहीं होता है। नवमी तिथि यानी मां सिद्धिदात्री की पूजा के दिन लोग अपने घरों में छोटी कन्याओं को बुलाकर कन्या पूजन करते हैं। बिना कंजक पूजा के नवरात्र व्रत का फल नहीं मिलता।
कन्या पूजन में 9 कन्याओं की पूजा देवी दुर्गा के नौ रूपों की तरह की जाती है। वहीं बालक को भैरव बाबा माना गया है। जो लोग दो बालक की पूजा करते हैं। एक बालक को भैरव बाबा और एक को भगवान गणेश का रूप मानते हैं। नवरात्र में कन्या पूजन और भैरव पूजन करने के बाद ही व्रत सफल होता है और माता रानी के आशीर्वाद से घर पर सुख-समृद्धि बनी रहती है।
अंशिका ने बताया कि वह हर साल इस दिन व्रत रखती हैं। कन्या पूजन करती हैं। इससे उन्हें काफी खुशी मिलती है। रानी ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी कन्या पूजन कर अपने व्रत को पूरा किया। सुनीता ने बताया कि व्रत तभी सफल होता है जब कन्या पूजन की जाती है। कन्या पूजन करके व्रत को सफल बनाना बहुत जरूरी होता है।