हरियाणा में राजनीतिक दखल रखने वाले रेवाड़ी विकास के मायने में हरियाणा के पिछड़े शहरों में शुमार है। यहां की जनता की सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से लिए जाने वाले फैसले कागजों तक सिमट कर रह गए हैं।
प्रशासन और नगर परिषद की अकसर होने वाली बैठकों में विकास के मुद्दों पर चर्चा तो होती है लेकिन मीटिंग हॉल से बाहर निकलने के बाद अधिकारी मीटिंग में शहर के विकास के संबंध में लिए फैसले भूल जाते हैं।
वहीं उच्चाधिकारी अपने अधीनस्थ को दिशा-निर्देश देकर खानापूर्ति कर कागजों में काम करा रहे हैं तो अधीनस्थ अपने उच्चाधिकारियों ने निर्देश मिलने के बाद भी कार्यालयों से बाहर तक नहीं निकल रहे हैं। शहर में व्यवस्थाओं के संबंध में पिछले एक महीने में कुछ बैठकें हुई। जनता की सुविधा के लिए फैसले लिए, लेकिन उन पर कितना काम हुआ। जानिए ग्राउंड रिपोर्ट।
ट्रैफिक लाइट: शहर में ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नाईवाली चौक, धारूहेड़ा चुंगी और दिल्ली रोड स्थित बाईपास पर ट्रैफिक लाइट लगी हुई है। कुछ दिन पहले लघु सचिवालय में हुई बैठक में जल्द ही टेंडर कर इन्हें ठीक कराने का फैसला हमारे अधिकारियों ने लिया, लेकिन यह फैसला मीटिंग हॉल के बाहर नहीं निकला। लोग जाम से जूझ रहे हैं और लाइट अभी तक ठीक नहीं हुई। दिन भर ट्रैफिक पुलिसकर्मी खड़े रहते हैं। थक जाते हैं तो कुछ देर वे भी सुस्ताने लगते हैं तो सबकुछ अव्यवस्थित हो जाता है। दिल्ली बाईपास पर स्टेडियम के पार चौराहे पर लोगों की जान भगवान भरोसे है। फोरलेन पर तेज दौड़ते के हमेशा टकराने का अंदेशा बना रहता है।
स्कूल बस: लघु सचिवालय में हुई बैठक में डीसी ने डीईओ को आदेश दिए थे कि हर निजी स्कूल में सीसीटीवी लगवाने के साथ यह सुनिश्चित करे कि ड्राइवरों के पास लाइसेंस है या नहीं। बसें नियमों का पालन कर रही है या नहीं। लेकिन अभी तक न बसों की जांच हुई और न सीसीटीवी लगे। कई ट्रैंपों भी बच्चों की जान को जोखिम में डाल रहे हैं। क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ढोह रहे हैं। लेकिन अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
शहर अतिक्रमण मुक्त: पिछले करीब छह महीने से शहर को अतिक्रमण मुक्त करने की योजना बाहर नहीं आ रही। दो-चार बार अतिक्रमण हटाया लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। फिर बात चाहे स्थाई या अस्थाई अतिक्रमण की हो। शहर में अतिक्रमण को रोकने के लिए दुकानों के आगे पीली पट्टी खींची जानी थी, लेकिन यह भी नहीं हुआ। वाहनों को व्यवस्थित खड़ा कराने के लिए पुलिस ने बैंक, होटल व कांप्लेक्स मालिकों की जिम्मेदारी तय की थी, लेकिन न इनके मालिकों ने कदम उठाया और न पुलिस ने कदम आगे बढ़ाया।
सफाई व्यवस्था: पूरे देश में 476 में 469वें नंबर आकर पहले ही शर्मिंदगी झेल रहे शहर के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कान पर अभी तक जूं तक नहीं रेंगी है। घर-घर से कचरा उठाने की योजना नगर परिषद से बाहर नहीं निकली। जहां-तहां गंदगी के ढेर लगे हैं। पूर्व में कुछ सामाजिक संगठनों ने भी सफाई व्यवस्था के लिए हाथ बढ़ाया लेकिन अब वे भी ठहर गए हैं। पूरा शहर सड़ांध मार रहा है। स्थिति जब और खतरनाक हो जाती है जब किसी दिन सरकारी अवकाश हो जाता है।
वर्जन..
शहर में अतिक्रमण समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। मार्च के पहले सप्ताह में शहर के अंदर एवं सर्कुलर रोड सहित सभी जगहों को अतिक्रमण मुक्त कर दिया जाएगा। वहीं सफाई के लिए वाडऱें में आबादी के हिसाब से सफाई कर्मी लगाने के साथ कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया जल्द ही धरातल पर दिखेगी।
-डॉ. अरविंद बाल्याण,ईओ, नप, रेवाड़ी
वर्जन...
जिले के अधिकतर स्कूलों की बसों में सीसीटीवी सहित अन्य सुरक्षा मानक पूरे कराए जारहे हैं। जिन स्कूलों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहबश्ं की है,उन स्कूलों की बसों को जब्त करने के आदेश दे दिए गए हैं।
-धर्मबीर बल्डोदिया, डीईओ,रेवाड़ी