रोडवेज बस में प्रवासी श्रमिकों के साथ बैठे पुलिसर्मी
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रेवाड़ी। लॉकडाउन के दौरान पिछले एक माह से जिले के शेल्टर होम में ठहरे करीब 390 प्रवासी लोगों को मंगलवार सुबह राज्य परिवहन की बसों में ग्वालियर और आगरा के लिए भेजा गया। राज्य परिवहन रेवाड़ी डिपो की 13 बसों में इन प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाया गया। इससे पूर्व भी राज्य परिवहन की बसों से राजस्थान के कोटा में फंसे विद्यार्थियों को लाया गया था। लॉकडाउन के बीच पलायन रोकने पर जिन श्रमिकों या प्रवासी लोगों को शेल्टर होम में ठहराया गया था, उन्हें रविवार को घर तक पहुंचाने के लिए मंगलवार को रेवाड़ी डिपो की 13 बसें रवाना हुई। क्वारंटीन पूरा कर चुके करीब 390 श्रमिकों को उनके घर पहुंचाया गया है।
सोशल डिस्टेंसिंग की पालना 30 यात्री बैठाए एक बस में
सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए बस में 30 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। वहीं शेल्टर होम खाली होने पर उन्हें सैनिटाइज भी किया गया। इसके अलावा बसों में बैठाने से पूर्व सभी श्रमिकों की जांच की गई। इसके अलावा मास्क व सैनिटाइजर भी दिए गए। जिले में करीब 22 शेल्टर होम बनाए गए थे, जिनमें हजारों श्रमिकों को रखा गया था। इनमें 70 प्रतिशत ऐसे श्रमिक थे, जो 14 दिन ही नहीं, बल्कि 28 दिन से भी ज्यादा का क्वारंटीन पूरा कर चुके थे। ऐसे में वे घर जाने की जिद पर अड़े हुए थे। ऐसे श्रमिकों को घर तक पहुंचाने के लिए चार दिन पहले ही प्रदेश सरकार ने व्यवस्था कर दी थी। देर रात जिला प्रशासन के आदेश पर रेवाड़ी डिपो के चालक-परिचालकों को तत्काल डिपो में बुलाने का आदेश दिया गया था, जिससे साफ हो गया था कि शेल्टर होम में ठहरे श्रमिकों को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। मंगलवार अलसुबह से ही शेल्टर होम से श्रमिकों को निकालना शुरू कर दिया गया था। प्रशासन ने ऐसी व्यवस्था की थी कि कोई सोशल डिस्टेसिंग ना टूटने पाए। इसके लिए रोडवेज बसों को ही शेल्टर होम के बाहर भेजा गया और फिर बारी-बारी कर एक बस में 30 श्रमिकों को बैठाया गया। बस में बैठाने से पहले श्रमिकों के हाथ सैनिटाइज कराए तथा उन्हें मास्क भी दिए गए।