रेवाड़ी। जिले में प्री-मानसून की दस्तक के साथ ही डेंगू का खतरा बढ़ने लगा है। जगह-जगह जलभराव होने से मच्छर जनित बीमारियां बढ़ने की आशंका है। इसको देखते हुए कोसली एसडीएच में डेंगू की जांच शुरू करने की तैयारी शुरू हो गई है।
नागरिक अस्पताल में डेंगू की जांच होती है। पीएचसी व सीएचसी में नमूने लिए जाते हैं जो जांच के लिए नागरिक अस्पताल भेजे जाते हैं। टेस्ट के बाद अगले दिन रिपोर्ट वापस पहुंचती है। रिपोर्ट आने में 24 से 48 घंटे लगते हैं जिससे संदिग्ध मरीजों का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाता।
इसको देखते हुए कोसली सामान्य अस्पताल में डेंगू की जांच शुरू करने की तैयारी है। जिला अस्पताल में अब तक 1035 टेस्ट किए जा चुके हैं, जिनमें अभी तक कोई पॉजिटिव केस नहीं मिला है।
निजी लैब में भी 25 सैंपल लिए गए हैं, जहां सभी की रिपोर्टें नेगेटिव आई हैं। गत वर्ष 2025 की बात करें तो जिले में कुल 5120 सैंपलों की जांच की गई थी, जिनमें 297 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी।
गत वर्ष ग्रामीण इलाकों में नैनसुखपुरा, धवाना व सहारनवास और शहरी क्षेत्र में यादव नगर, गुलाबी बाग, मॉडल टाउन व सेक्टर-4 को हॉट स्पॉट घोषित किया गया था। विभाग का कहना है कि इस बार इन चिह्नित जगहों पर विशेष फोकस किया जा रहा है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
डिप्टी सिविल सर्जन एवं मलेरिया नोडल अधिकारी डॉ. जोगिंद्र तंवर ने बताया कि डेंगू का मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में अंडे देता है। ऐसे में लोगों को घर में मनी प्लांट की बोतल, फ्रिज की ट्रे, कूलर और गमलों के नीचे की प्लेटों में पानी नहीं जमा होने देना चाहिए। अचानक तेज बुखार आना, आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द होना, जोड़ों और मांसपेशियों में भयंकर दर्द होना, बुखार आने के 2 से 5 दिन बाद शरीर पर लाल दाने या चकत्ते होना और जी मिचलाना, उल्टी होना व भूख न लगना डेंगू के लक्षण हैं। ऐसा लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह कोई दवा न लें। डेंगू में तेज बुखार के कारण शरीर से पानी तेजी से कम होता है। नारियल पानी, ओआरएस, छाछ या नींबू पानी लेने से रिकवरी तेज होती है।