प्रदेश के बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक बावल आईएमटी में शुक्रवार सुबह एक नामी पेंट की कंपनी ने स्थाई व अस्थाई करीब 400 कर्मचारियों के लिए बिना कारण बताए गेट बंद कर दिया। इससे नाराज कर्मचारियों ने कंपनी के समीप ही धरने पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस को भी तैनात किया गया है। वहीं आईएमटी की दूसरी कंपनियों में भी हलचल बढ़ गई है। कई अन्य कंपनियां अपने कर्मचारियों को दूसरे राज्यों की इकाइयों में भेजने की बहानेबाजी कर रही है। इससे कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों में रोष है।
उल्लेखनीय है कि पेंट बनाने वाली कंपनी में कुछ दिन से करीब 70 श्रमिकों का वेतन को लेकर प्रबंधन से विवाद चल रहा था। इसके कारण उन श्रमिकों को कंपनी से निकाल दिया गया। इसके विरोध में यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रबंधन से बात की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। शुक्रवार सुबह अचानक कंपनी प्रबंधन ने करीब 400 कर्मियों के लिए गेट बंद करा दिया। इससे नाराज श्रमिकों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने के साथ ही धरना शुरू कर दिया।
400 परिवारों पर खड़ा हुआ रोजी रोटी का संकट
कंपनी से निकाले गए कर्मचारियों में कुछ ऐसे भी थे, जो धरने पर बैठे हुए रोते हुए नजर आए। निकाले गए करीब 400 कर्मचारियों के परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। अधिकांश परिवार का पालन पोषण यहीं कर्मियों की नौकरी से ही हो रहा था। कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ कर्मचारियों सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी की।
कई कंपनियों में चल रही निकालने की तैयारी
जानकारी के अनुसार बावल आईएमटी में स्थित कंपनियों में पिछले कुछ दिनों से हलचल दिख रही है। कई कंपनियां कर्मचारियों को बाहर निकालने का रास्ता तलाश कर रही है। इसकी शुरुआत पेंट कंपनी ने तो कर दी, लेकिन दूसरी कंपनियों विकल्प नहीं ढूंढ़ पा रही है। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को दूसरे राज्यों में भेजने की तैयारी की है, लेकिन कर्मचारी न जाने की जिद पर अड़े हैं। दूसरे राज्यों की बहानेबाजी में कर्मचारियों को सिर्फ प्लांट से निकालने की तैयारी है।
1200 से ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनी
बावल का नाम औद्योगिक क्षेत्र की वजह जाना जाता है। यहां नेशनल व मल्टी नेशनल कंपनियां हैं। कई कंपनियों के प्लांट तो सिर्फ इंडिया में सिर्फ बावल में ही हैं। यहां 1200 से ज्यादा छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। फिलहाल कुछ एक कंपनियों को छोड़कर हर कंपनी में कर्मचारियों पर संकट की तलवारें लटक रही हैं।
10 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का चल रहा घर
बावल में 12 सौ से ज्यादा कंपनियों में 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। कंपनियों में काम एक तरह से कम हुआ है। खासकर ऑटो सेक्टर में मंदी की मार ज्यादा दिखाई दे रही है। जबकि ऑटो की सहायक कंपनियों की इकाई बावल में ही स्थापित है। बड़ी संख्या में रेवाड़ी ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के अलावा दूसरे प्रदेशों के लोग भी बावल की कंपनियों में नौकरी कर अपना घर चला रहे हैं।