रेवाड़ी। जिले में 3 दिन के एक बच्चे की मौत हो गई। बच्चे के पिता ने नागरिक अस्पताल में आईसीयू स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया है। साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है।
दरअसल शहर से सटे गांव बिठवाना निवासी दिनेश कुमार ने बताया कि वह कंटेनर डिपो में बतौर क्लर्क कार्यरत है। 12 मार्च को पत्नी सुनीता की डिलीवरी होनी थी। पहले उसने भाड़ावास गांव स्थित पीएचसी में उसे भर्ती कराया, जहां डिलीवरी में टाइम होने का हवाला देकर उसे रेवाड़ी नागरिक अस्पताल भेज दिया। दिनेश ने बताया कि नागरिक अस्पताल में पहुंचने के बाद डॉक्टर ने उनकी पत्नी की मेडिकल जांच की और बताया कि उसे पेन नहीं है, लेकिन उसकी डिलीवरी का समय पूरा हो चुका है। ऐसे में ऑपरेशन से डिलीवरी की जाएगी।
दिनेश द्वारा ऑपरेशन से डिलीवरी की सहमति देने के बाद सकुशल डॉक्टर ने डिलीवरी करा दी। पत्नी सुनीता ने लड़के को जन्म दिया। दिनेश ने बताया कि उस समय डॉक्टर ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान बच्चे ने शौच कर दिया। इसकी वजह से उसे इंफेक्शन फैलने का खतरा है। ऐसे में उसे आईसीयू में रखना जरूरी है।
पूरा स्टाफ सोता मिला
बच्चे को आईसीयू में डॉक्टर की निगरानी में रखा गया। दिनेश का आरोप है कि पत्नी को दूसरे रूम में और बच्चे को आईसीयू में रखा गया था। ऐसे में बच्चे को दूध पिलाने में तकलीफ थी। इसकी वजह से 15 मार्च की रात वह आईसीयू रूम में गया तो वहां पूरा स्टाफ उसे सोता मिला। जैसे ही उसने अंदर जाने की कोशिश की तो एक स्टाफ नर्स ने उसे धमकाया और कहा कि यहां पुरुष की एंट्री नहीं है। दिनेश ने जब अपनी बात रखी तो उसने सुबह आने को कहा। 16 मार्च की अलसुबह उसने अपनी मां को बुलाया तो उसके बच्चे की कोई मूवमेंट नजर नहीं आई।
बच्चे का जन्म रेवाड़ी नागरिक अस्पताल में हुआ था। इसके बाद उसे वहां से रोहतक रेफर किया गया, लेकिन झज्जर पहुंचने के बाद जांच कराई तो उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर के बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया है। बच्चे के पिता दिनेश ने आईसीयू स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है। मामले की जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- अमित कुमार, जांच अधिकारी