रेवाड़ी। नगर परिषद प्रशासन ने चार प्राचीन तालाबों का कायाकल्प करने का निर्णय लिया है। मानसून से पहले सोलहाराही तालाब, बड़ा तालाब, शास्त्री नगर तालाब और नंद सरोवर तालाब की सफाई और जलनिकासी का कार्य किया जाएगा। इसके लिए 24.78 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया है। टेंडर के लिए 13 जून तक आवेदन मांगे गए हैं।
डी-वाटरिंग के बाद तालाबों की सफाई, गाद निकासी और विकास कार्यों को गति मिलेगी, जिससे जल संरक्षण क्षमता बढ़ने के साथ ही जलभराव की समस्या पर अंकुश लगेगा।
तालाबों में लंबे समय से पानी भरा है जिसके कारण गाद निकालने और अन्य विकास कार्यों में परेशानी आ रही है। डी-वाटरिंग के माध्यम से तालाबों का पानी निकालकर सफाई की जाएगी। इससे जल संरक्षण क्षमता बढ़ने के साथ ही बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।
मानसून सीजन को देखते हुए तालाबों में भरे पानी की निकासी आवश्यक है। कई स्थानों पर पानी लंबे समय से भरा है जिसके कारण आगामी रखरखाव और सफाई कार्य प्रभावित हो रहा है।
सोलहाराही तालाब और बड़ा तालाब का सुंदरीकरण दस करोड़ रुपये से किया गया है। इसके बाद देखरेख के लिए इन्हें नगर परिषद या पुरातत्व विभाग के सुपुर्द नहीं किया गया है। ऐसे में देखरेख के अभाव में रंगाई-पुताई झड़ रही है। संवाद
एक साल बीतने के बाद भी हैंडओवर नहीं किए गए दो तालाब
हरियाणा विधानसभा की तीन सदस्यीय पर्यावरण समिति ने सोलहाराही तालाब और बड़ा तालाब का निरीक्षण कर अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहा है। लोक निर्माण विभाग का कार्य मई 2025 में पूरा हो गया था। 1 साल बीतने के बाद भी दोनों तालाब देखरेख के लिए नगर परिषद या पुरातत्व विभाग को हैंडओवर नहीं किए गए हैं। रखरखाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है। समिति ने यह भी कहा था कि तय समय के बाद दोबारा निरीक्षण किया जाएगा।
सोलहाराही तालाब
सोलहाराही तालाब सबसे पुराने जलाशयों में से एक है। 1650 ईस्वी में राव गुजर मल ने इसे बनवाया था। इसे प्रारंभ में सोलहाराही शिव सरोवर कहा जाता था, क्योंकि इसमें सोलह घाट (स्नान मंच) थे। उत्तर पूर्व में दो कुएं हैं जिन्हें 1888 में गंगा राम सिंह और रुद्र सिंह बनवाया था जो पीने का पानी उपलब्ध कराते थे। ये तालाब सेक्टर 1 में स्थित है।
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बड़ा तालाब
सर्कुलर रोड के पास स्थित बड़ा तालाब पुराने और प्रमुख तालाबों में से एक है। बड़ा तालाब राव तेज सिंह ने सन् 1810-1815 के दौरान बनवाया था। इसे राव तेज सिंह तालाब के नाम से भी जाना जाता है। इसमें बारिश का पानी आता है। बड़ा तालाब के किनारे भगवान हनुमान का एक मंदिर भी स्थित है। लंबे समय से जमा पानी के कारण इसके रखरखाव संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
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शास्त्री नगर तालाब
शास्त्री नगर क्षेत्र में स्थित यह तालाब स्थानीय निवासियों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है। घनी आबादी वाले क्षेत्र में होने के कारण इसकी साफ-सफाई और रखरखाव विशेष महत्व रखता है। बरसात के मौसम में यह तालाब अतिरिक्त पानी को संग्रहित करने का कार्य करता है। इस मच्छरजनित बीमारियों से बचा जा सकता है।
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नंद सरोवर तालाब
नंद सरोवर जिसे स्थानीय लोग छोटा तालाब भी कहते हैं एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। सरोवर का निर्माण राजा नंदराम ने करवाया था। यह स्थान प्राचीन मंदिरों से घिरा हुआ है और शहर के बीचों-बीच अपनी ऐतिहासिक पहचान संजोए हुए है। सुंदरीकरण के लिए नगर परिषद और सामाजिक संस्था अहीरवाल हेरिटेज ने संयुक्त प्रयास से स्वच्छता अभियान भी चलाया था। डी-वाटरिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद तालाब के पुनरोद्धार कार्यों को गति मिलने की संभावना है।
वर्जन:
तालाबों की डी-वाटरिंग का कार्य किया जाएगा। इसके लिए टेंडर जारी किया गया है। तालाबों की देखरेख को लेकर जल्द बैठक होनी है।-अंकित, एक्सईएन, नगर परिषद रेवाड़ी।