रेवाड़ी। जिले के सभी राजकीय विद्यालयों में ई-अधिगम योजना के तहत वितरित किए गए टैबलेट का डाटा एमआईएस पोर्टल पर अपडेट करने में सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है। शिक्षा विभाग ने नवंबर तक टैबलेट की वर्तमान स्थिति को एमआईएस पोर्टल पर अपडेट करने का निर्देश दिया था। दो माह से अधिक समय बीतने के बाद भी 6517 टैबलेट के डाटा अपलोड नहीं किए गए हैं।
डाटा अपडेट नहीं होने से शिक्षकों और विद्यार्थियों के टैबलेट पर इंटरनेट की सुविधा नहीं मिल रही है जिससे उपस्थिति दर्ज करने,पढ़ाई समेत अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
जिले के विद्यालयों में कुल 21 हजार 5 टैबलेट वितरित किए गए हैं। इनमें से अब तक केवल 14 हजार 983 टैबलेट के ही डाटा एमआईएस पोर्टल पर अपडेट हो पाए हैं। करीब 6517 टैबलेट के डाटा अभी अपडेट नहींं हुए हैं।
शिक्षा विभाग ने 19 हजार 479 टैबलेट विद्यार्थियों और 1526 टैबलेट अध्यापकों को वितरित किए थे लेकिन विद्यालय मुखियाओं और संबंधित स्टाफ की उदासीनता के चलते तय समयसीमा के बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।
डाटा अपडेट होने के बाद नए शैक्षणिक सत्र से टैबलेट में इंटरनेट सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन शैक्षणिक सत्र 2025-26 की शुरुआत से ही विद्यार्थियों को इंटरनेट सुविधा नहीं मिल पा रही है। इंटरनेट के अभाव में विद्यार्थी टैबलेट का उपयोग केवल ऑफलाइन सामग्री तक ही सीमित रखे हुए हैं, जिससे ई-लर्निंग के उद्देश्य को झटका लगा है।
पहले विद्यार्थियों का डाटा अवसर पोर्टल पर दर्ज होता था। इसी पोर्टल के माध्यम से सिम कार्ड अलॉटमेंट और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी लेकिन करीब एक वर्ष से अवसर पोर्टल बंद पड़ा है।
इसके चलते विद्यार्थियों को इंटरनेट सुविधा मिलनी ठप हो गई। अब विभाग ने एमआईएस पोर्टल पर डाटा अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की है ताकि विद्यार्थियों को नए सिम कार्ड जारी किए जा सकें और टैबलेट का पूर्ण लाभ मिल सके।
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टैबलेट के फायदे
टैबलेट से विद्यार्थियों को ई-बुक, वीडियो लेक्चर, ऑनलाइन कोर्स और सिमुलेशन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। एक ही डिवाइस में कई विषयों की सामग्री होने से पढ़ाई सरल हो गई है और किताबों का बोझ भी कम हुआ है। क्विज़, गेम-बेस्ड लर्निंग और 3डी मॉडल के माध्यम से पढ़ाई अधिक रुचिकर बनती है। इंटरनेट के जरिए नई जानकारी तुरंत मिल जाती है। साथ ही टैबलेट के उपयोग से डिजिटल टूल्स, टाइपिंग और ऑनलाइन रिसर्च जैसे जरूरी तकनीकी कौशल सीखने में भी विद्यार्थियों को मदद मिलती है।
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पासआउट पर स्कूल में जमा कराने होते हैं टैबलेट
शिक्षा विभाग की तरफ से वर्ष 2022 में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को ई-अधिगम योजना के तहत टैबलेट वितरित किए गए थे। इसके बाद से ही विद्यार्थियों को प्रतिदिन टैबलेट में दो जीबी इंटरनेट डाटा की सुविधा दी जा रही थी ताकि विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाया जा सके। विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी टैबलेट वितरित किए गए थे। इन टैबलेट के वितरण की जानकारी विद्यालय में दर्ज होती है। जो विद्यार्थी पासआउट होकर या विद्यालय छोड़कर जाता है तो उसे विद्यालय में टैबलेट जमा कराना होता है।
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टैबलेट के नुकसान
टैबलेट के अधिक उपयोग से विद्यार्थियों में स्क्रीन टाइम बढ़ जाता है जिससे आंखों में दर्द, सिरदर्द और नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। गेम और सोशल मीडिया का आकर्षण पढ़ाई से ध्यान भटकने का कारण बन सकता है। डिजिटल लिखाई पर ज्यादा निर्भरता से हैंडराइटिंग का अभ्यास कम हो रहा है। इसके अलावा गलत वेबसाइटों तक पहुंच, वायरस का खतरा और ऑनलाइन ठगी जैसे जोखिम भी टैबलेट उपयोग के दौरान बने रहते हैं, इसलिए इसका संतुलित और सुरक्षित इस्तेमाल जरूरी है।
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वर्जन
एमआईएस पोर्टल पर टैबलेट का डाटा समय पर अपडेट करना अनिवार्य है। सभी बीईओ ने अपने क्षेत्र के सभी विद्यालय मुखिया को निर्देश दिए हैं। लापरवाही बरतने वाले विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश जाएगी।-अशोक नामवाल, नोडल अधिकारी, ई-अधिगम।