संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी/धारूहेड़ा। ठंड का मौसम शुरू होने के साथ ही धुंध शुरू हो गया है लेकिन सड़क सुरक्षा को लेकर अपेक्षित व्यवस्था नहीं की जा सकी है। सड़कों पर रिफ्लेक्टर व पीली टेप नहीं होने से हादसे का डर बना रहता है।
शहर और धारुहेड़ा क्षेत्र की सड़कों पर अभी तक रिफ्लेक्टर व पीली टेप नहीं लगाई जा सकी है। कोसली और बावल के अलावा दिल्ली-जयपुर हाईवे पर भी यही स्थिति है। हाईवे पर रिफ्लेक्टर होना बहुत जरूरी है। साथ ही पीली टेप भी सड़कों के किनारे लगी ग्रिल पर नहीं है। इसके कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। स्थिति यह है कि कई लोगों ने वाहनों पर भी पीली टेप नहीं लगाई है। ऐसे वाहन रात के समय पीछे से आने वाले वाहन चालकों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। अक्सर कोहरे के मौसम में घटनाएं हर साल देखने को मिलती हैं।
रिफ्लेक्टर का असल काम रात का होता है। कोहरा के समय सड़क का दायरा पता लगाने के लिए लोग सफेद पट्टी और इस रिफ्लेक्टर का इस्तेमाल करते हैं। इनमें दो तरह के रिफ्लेक्टर होते हैं जो सड़क पर दिखाई देते हैं। इनमें से एक को एक्टिव रिफ्लेक्टर्स और दूसरे को पैसिव रिफ्लेक्टर्स कहा जाता है। इसमें से एक रिफ्लेक्टर्स में रेडियम की वजह से लाइट देता है, जबकि एक में लाइट के लिए एलईडी लगी होती है। ये रिफ्लेक्टर दूर से ही चमकते हैं।
हाईवे के किनारे खड़े होते हैं ट्रक चालक
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर जगह-जगह भारी वाहनों की अवैध पार्किंग मुसीबत बनी हुई है। हाईवे की हालत यह है कि औद्योगिक कस्बा से गुजरने वाले हाईवे संख्या-48 पर ट्रक चालक कहीं भी अपनी ट्रकें खड़ी कर देते हैं। ऐसी अवैध पार्किंग से सर्विस रोड अछूता नहीं रहता। ऐसे में धुंध में पीछे से गाड़ी टकराने का भी खतरा बना रहता है।
वर्जन:
हाईवे पर रिफ्लेक्टर होना बहुत जरूरी है। रात के समय यह काफी उपयोगी सिद्ध होते हैं। इससे दुर्घटनाएं कम होती हैं। रिफ्लेक्टर ना होने की वजह से रात के समय कुछ भी दिखाई नहीं देता है।-प्रदीप कुमार, धारूहेड़ा।
रात के समय वाहन चालक तेजी से ड्राइविंग करते हैं रिफ्लेक्टर ना होने के कारण कोहरे के मौसम में वाहन चलाना काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इसके लिए इंतजाम करने की जरूरत है। -अश्विनी कुमार, धारूहेड़ा।
वर्जन:
कोहरे से निपटने के लिए सड़क सुरक्षा संबंधित अधिकतर कार्य पूरे हो चुके हैं। हाईवे पर व्यवस्था को काफी हद तक सुधार दिया गया है। जो थोड़ा बहुत बचा हुआ है, इस पर भी कार्य शुरू करवा दिया गया है। योगेश, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई