आने वाले दिनों में पलायन करने वाले श्रमिकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अधिकांश कंपनियों में वेतन 7 से 10 तारीख के बीच दिया जाता है जिसके चलते कई श्रमिक रुके हुए हैं। कुछ श्रमिक अपने गृह राज्यों को लौटने की तैयारी में हैं लेकिन बकाया वेतन मिलने की उम्मीद उन्हें फिलहाल रोककर रखे हुए हैं।
फैक्टरियों में उत्पादन पर असर
खाड़ी देशों में तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण निर्यात प्रभावित हुआ है जिससे स्थानीय फैक्टरियों में उत्पादन पर असर पड़ा है। ऑर्डर कम होने और कच्चे माल की आपूर्ति में दिक्कतों के चलते कई इकाइयों ने काम धीमा कर दिया है। इसका सीधा असर श्रमिकों की आय पर पड़ रहा है। इससे उद्योगों में श्रमिकों की कमी भी पैदा हो सकती है।
उद्योगों और श्रमिकों दोनों के लिए बढ़ सकती है चुनौती
रेवाड़ी चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रधान कृष्ण यादव ने बताया कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो उद्योगों और श्रमिकों दोनों के लिए चुनौती बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार और संबंधित विभागों को समय रहते कदम उठाने की जरूरत है ताकि श्रमिकों के रोजगार और उद्योगों की गतिविधियों को स्थिर रखा जा सके। जिले में संचालित 400 से अधिक उद्योग इस समय प्रभावित हो रहे हैं।