जिन पटरियों पर काम करते हुए नौकरी की उन्हीं पटरियों पर सेवानिवृत्ति के बाद एक इंजीनियर की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। जबकि दूसरा इंजीनियर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
ये हादसा कोसली रेलवे स्टेशन से रेवाड़ी की तरफ आउटर के पास हुआ। दोनों कैसे ट्रेन की चपेट में आए, इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है। क्योंकि घटना स्थल पर पटरियां बिछाने का काम हो चुका है, ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि आखिर वे दोनों वहां किसलिए गए थे।
जानकारी के अनुसार रेवाड़ी-हिसार ट्रैक पर सुबह करीब सवा नौ बजे के लगभग जयपुर निवासी 67 वर्षीय इंजीनियर जेवी सिंह व गाजियाबाद निवासी इंजीनियर रविंद्र लाइन पर काम कर रहे थे। इसी दौरान रेवाड़ी की ओर से आ रही मालगाड़ी की चपेट में आ गए। मालगाड़ी तेज गति से आ रही थी।
घटना कोसली स्टेशन और रेवाड़ी की तरफ आउटर सिगनल के बीच हुई। इस हादसे में जेवी सिंह की की मौके पर मौत हो गई जबकि रविंद्र गायल हो गया। मालगाड़ी चालक ने तुरंत इसकी सूचना स्टेशन अधीक्षक को दी। इसके बाद मौके पर जीआरपी पहुंची और घायल रविंद्र को अस्पताल ले जाया गया।
बाद में जीआरपी ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए दादरी भेज दिया। इधर, जीआरपी ने घटना की जांच शुरू कर दी है। वहीं कंपनी अधिकारी मालगाड़ी के चालक पर हॉर्न न बजाने आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी और कोसली जीआरपी कंपनी के अधिकारियों की लापरवाही बता रही है। इस हादसे के बाद लगभग एक घंटा तक इस लाइन मार्ग पर गाड़ियों का आवागमन भी बाधित रहा।
एक साल पहले ही जुड़े थे कंपनी से
इंजीनियर जेवी सिंह व रविंद्र कुमार रेलवे विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद गुड़गांव की वोमेज सोलीसन कंपनी से जुड़ कर काम कर रहे थे। कंपनी ने रेवाड़ी से हिसार डबल लाइन बिछाने का काम लिया हुआ है। इन दोनों को भी कंपनी ने यहीं पर लगाया हुआ है। दोनों इंजीनियर सुबह लाइन पर काम करने के लिए निकले थे। दोनों ही कोसली में ही किराए के मकान में रह रहे थे।
कोसली जीआरपी चौकी में तैनात कर्मचारी देशराज का कहना है कि लाइन जो बिछाई जा रही है वह जिस ट्रैक पर मालगाड़ी आ रही थी उससे दूर है। ऐसे में यह यह समझ नहीं आता कि वह चालू लाइन पर वे क्या कर रहे थे। अगर काम कर रहे होते तो उनसे अनुमति लेते। दोनों इंजीनियर्स के साथ हेल्पर के होने या न होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि इंजीनियर्स के साथ हेल्पर अनिवार्य होता है। बताया यह भी जा रहा है कि उनके साथ हेल्पर था लेकिन वह हादसे के समय इधर उधर था।
क्या कहना है कंपनी का
कंपनी के साइट इंचार्ज एवं रेजिडेंट इंजीनियर रामदेव का कहना है कि ऐसा हो सकता है कि मालगाड़ी चालक ने हॉर्न न दिया हो और इंजीनियर काम कर रहे हों। जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। कंपनी द्वारा चालू लाइन पर रेलवे के नियमों के खिलाफ जाकर काम करते समय लाल झंडी आदि न लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हर रोज ऐसे ही काम होता था यह तो घटना होनी थी जो घट गई। इस घटना के लिए उन्होंने जिम्मेदार मालगाड़ी चालक को बताया।
मामले की करेंगे जांच
हादसे कि सूचना के बाद मौके पर पहुंचे। रेलवे से सेवानिवृत्त इंजीनियर जेवरी सिंह व रविंद्र ट्रेन की चपेट में आ गए। दोनों लाइन पर काम करने आए थे। हादसा किन कारणों से हुआ, इसकी जांच की जाएगी।
धर्मबीर ,सब इंस्पेक्टर, जीआरपी
उठते सवाल:
1. पटरियां कोसली स्टेशन से भिवानी की तरफ आउटर तक बिछ चुकी है तो दोनों इंजीनियर रेवाड़ी की तरफ आउटर सिगनल पर किसलिए गए थे।
2. इंजीनियरों के साथ हेल्पर अनिवार्य होता है। ताकि ट्रेन आने पर उन्हें अलर्ट कर सके। हेेल्पर था या नहीं। था तो वह उस वक्त कहां था।
3. चालू लाइन पर इंजीनियर कैसे पहुंचे। जबकि उनका काम नए ट्रैक पर था, जो चालू लाइन से हटकर है।
4. मालगाड़ी चालक ने हॉर्न दिया या नहीं।