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अस्पताल के गेट पर प्रसूता का शव रख किया हंगामा

Mon, 04 Jan 2016 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
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नागरिक अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन से बच्चे को जन्म देने के बाद हालात बिगड़ने पर पीजीआई रेफर प्रसूती की मौत पर परिजनों ने रविवार को एक घंटे तक जमकर बवाल काटा।
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परिजनों ने अस्पताल गेट पर शव रखकर डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। परिजन डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग कर रहे थे। मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को शांत किया।

बिहार के बेगुसराय का निवासी संजीत परिवार के साथ शहर के उत्तम नगर में रहता है। संजीत ने गर्भवती पत्नी सोनी को शनिवार सुबह 7:30 बजे डिलीवरी के लिए नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया था। संजीत ने बताया कि डॉक्टर उसकी पत्नी सोनी को सिजेरियन के लिए ऑपरेशन थियेटर ले गए।
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एक घंटे से ज्यादा चले आपरेशन के बाद सोनी ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। सिजेरियन डिलीवरी होने के कारण चिकित्सकों ने प्रसूता को सघन कक्ष में ही रखा। जैसे ही सोनी को होश आया तो वह जोर-जोर से दर्द से कराहने लगी। कुछ ही समय बाद उसका पेट भी फूल गया।

संजीत ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के दौरान सोनी के पेट की सफाई नहीं की और पेट के अंदर ओरनॉल छोड़ दी। इससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। दोपहर के दो बजे डॉक्टर एक बार फिर से सोनी को ऑपरेशन के लिए ले गए और शाम के साढ़े पांच बजे तक ऑपरेशन थियेटर में रखने के बाद पीजीआई रेफर कर दिया।

 एंबुलेंस में शाम 7:30 बजे उसे रोहतक पीजीआई लेकर पहुंचे, चिकित्सकों ने उसे 8:00 बजे भर्ती कर लिया। काफी मशक्कत के बाद भी पीजीआई के डॉक्टर उसकी पत्नी को नहीं बचा सके। रात 2.53 बजे पर उसे मृत घोषित कर दिया।

पहला दूध ही पी सका नवजात
शनिवार सुबह 10:00 बजे प्रसूता सोनी ने बच्चे की किलकारी सुनी। प्राथमिक मेडिकल केयरनेस के बाद नवजात को मां का दूध पिलाया गया। दूध पिलाने के थोड़ी देर बाद ही सोनी की तबीयत खराब हो गई और 24 घंटे के अंदर उसकी मौत हो गई। मृतका सोनी को इससे पहले दो साल की बेटी पायल है।

पहले घर गए, बाद में आए अस्पताल
संजीत अपनी पत्नी का शव लेकर रोहतक से रविवार सुबह 6:00 बजे उत्तम नगर स्थित किराए के मकान पर पहुंचा। मौत की सूचना जब आसपास के लोगों को लगी तो पार्षद गुरदयाल की अगुवाई में शव लेकर अस्पताल गेट पर पहुंचे। गेट पर शव रखकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ एक घंटे तक प्रदर्शन किया।

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि मौत डॉक्टरों की लापरवाही के कारण हुई है इसलिए डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज हो। तहसीलदार नौरंग राय और सिटी थाना प्रभारी के आश्वासन के बाद शव को मोर्चरी में रखवाया गया।

आईसीयू के नियम भूले अधिकारी
अति सघन कक्ष में मरीजों को इसलिए रखा जाता है, ताकि उन्हें संक्रमण से बचाया जा सके। एसएचओ हितेंद्र कुमार और तहसीलदार दोनों ही नवजात बच्चे का हाल जानने जूते पहनकर ही अंदर चले गए। अति सघन कक्ष के बहार सिक्योरिटी गार्ड भी उन्हें कुछ नहीं बोल पाए। जबकि गेट के बाहर साफ लिखा है कि अंदर जूते निकाल और मुंह पर मास्क लगाकर जाएं।
बच्चे को भी कर दिया डिस्चार्ज
प्रसूता को पीजीआई रेफर करने के साथ ही अस्पताल से नवजात बच्चे को भी एंबुलेंस में बैठा दिया। रविवार सुबह जब परिजनों ने अस्पताल के गेट पर प्रदर्शन किया तो आनन-फानन में नवजात को निकू वार्ड में भर्ती किया गया।  

कोट्स
सोनी को जब अस्पताल में लाया गया, तब उसकी हालत गंभीर थी। बच्चा फंसा हुआ था, गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत आपरेशन कर डिलीवरी कराई गई। उसका यूट्रस कुछ ढीला था और खून जमने की आशंका के कारण दोबारा आपरेशन किया था। चिकित्सकों की प्राथमिकता मरीज को बचाने की होती है। फिर भी जांच कराई जाएगी। यदि कोई लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी। - डा. सुदर्शन पंवार, एसएमओ, नागरिक अस्पताल

परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दी है। शिकायत ले ली गई है। मामले की जांच की जाएगी। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। - हितेंद्र कुमार, शहर थाना प्रभारी
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