रेवाड़ी। आरटीआई एक्टिविस्ट और पुलिस महकमे के लोक सूचना अधिकारी व डीएसपी हेडक्वार्टर वीरेंद्र सिंह सैनी के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप और कार्रवाई के दौर में एक और पन्ना जुड़ गया है। करीब डेढ़ महीने पहले कोटपूतली थाने में दर्ज जीरो एफआईआर पर अब जिले के डीएसपी वीरेंद्र सिंह सैनी ने राजस्थान पुलिस से पूछा है कि उनके खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज किस नियम के तहत दर्ज हुई है। उन्होंने जयपुर ग्रामीण राजस्थान के पुलिस अधीक्षक और राज्य जन सूचना अधिकारी से सूचना अधिनियम के अंतर्गत उनके खिलाफ आरटीआई एक्ट 2005 के तहत कोटपूतली थाने में दर्ज एफआईआर को लेकर इस मामले सहित और भी जानकारी मांगी है। डीएसपी ने सूचना के अधिकार का प्रयोग कर 21 सवालों के जवाब और उनके प्रमाण भी मांगे हैं।
किस पुलिस मैन्युअल के अंतर्गत हुई जीरो एफआईआर
डीएसपी वीरेंद्र सिंह सैनी ने पूछा है कि राजस्थान पुलिस के किस पुलिस मैन्युल या किस अन्य एक्ट के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही नियमों की कॉपी मांगने के साथ यह भी पूछा है कि डीएसपी रैंक के अधिकारी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने पर स्पेशल रिपोर्ट श्रेणी में आता है या नहीं। स्पेशल रिपोर्ट की श्रेणी में आने पर उसकी सत्यापित कॉपी और प्रथम सूचना रिपोर्ट प्राप्त करने वाले अधिकारियों के नाम भी पूछे हैं। नहीं जारी होने की स्थिति में नियम की प्रति मांगी है। इसके अलावा इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर का नाम, पता और मोबाइल नंबर भी मांगा है।
झूठे तथ्यों पर एफआईआर में किसकी जिम्मेदारी और क्या है सजा
डीएसपी ने पूछा है कि अगर झूठे तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाती है तो किस-किस अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है और राजस्थान पुलिस के अनुसार इसमें सजा के क्या प्रावधान हैं। इसके अलावा दरख्वास्त राव धनबीर सिंह के द्वारा किस अधिकारी को दी गई और उसने इस पर क्या एक्शन लिया, यह भी पूछा गया है। इसके अलावा 13 सितंबर को सरकारी अवकाश था, दरख्वास्त किस अधिकारी ने और कहां मार्क की यह भी बताया जाए। इसके अलावा दरख्वास्त जिस अधिकारी के पास पहुंची उसका नाम, 13 सितंबर को कोटपूतली थाने के प्रबंधक का नाम, पता और मोबाइल नंबर भी पूछा गया है।
यह है मामला:
-डीएसपी पर लगाया था सूचना देने में गुमराह करने का आरोप
कोटपुतली थाना क्षेत्र के हाउसिंग बोर्ड निवासी आरटीआई एक्टिविटिस्ट राव धनबीर सिंह ने 6 मई 2015 को सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत कुछ जानकारी मांगी थी। यह जानकारी लोक सूचना अधिकारी ने 8 जून 2015 को मेल एसपी रेवाड़ी आरटीआई के जरिए जीमेल से दी थी। आरटीआई कार्यकर्ता ने मेल को अनाधिकृत और जानकारी भी अपूर्ण और गलत बताई थी। जिसके बाद राजस्थान के कोटपूतली थाने में रेवाड़ी जिले में तैनात पुलिस महकमे के लोक सूचना अधिकारी व डीएसपी वीरेंद्र सिंह सैनी समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की 10 धाराओं और सूचना तकनीक अधिनियम 2000 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
यह मांगीं गई थीं जानकारी
- 2005 से अब तक कितने चालान रेवाड़ी न्यायालय में पेश किए गए।
- बरी होने या चार्ज नहीं लगने पर जांच अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई।
- 2005 से अब तक जांच गलत करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
कोट्स
जयपुर ग्रामीण लोक सूचना अधिकारी से जीरो एफआईआर को लेकर जानकारी मांगी है। मांगों के संबंध में जवाब मिलने की उम्मीद है। जिसके आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - वीरेंद्र सिंह सैैनी, डीएसपी