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चेयरपर्सन, तत्कालीन सचिव व एकाउंटेंट दोषी

Sat, 24 Oct 2015 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
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म्यूनिसिपल एक्ट 1973 की धारा-35 के तहत नगर परिषद की ओर से कराए गए कार्यों में गड़बड़ी पाए जाने पर चेयरपर्सन शकुंतला भांडोरिया, तत्कालीन सचिव व तत्कालीन एकाउंटेंट आदि को दोषी माना गया है।
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एसडीएम से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उपायुक्त डॉ. यश गर्ग ने इसे नगर निकाय निदेशक को भेज दिया है। सूत्रों का कहना है कि प्राथमिक तौर पर चेयरपर्सन की डीडी पावर पर रोक लगाने की सिफारिश की है, लेकिन उपायुक्त ने इसकी पुष्टी नहीं की है।

नियमानुसार आपातकाल में धारा-35 के तहत नगर परिषद चेयरपर्सन अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए शहर में बिना हाउस में प्रस्ताव पास किए तत्काल कार्य करा सकती है, लेकिन इन कार्यों को हाउस की अगली ही बैठक में रखना होता है। इस मामले में काम तो करा लिए लेकिन हाउस की बैठक में इन्हें नहीं रखा गया।
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खास बात यह है काम भी कोई ऐसा नहीं था, जो तत्काल कराया जाए। एसडीएम मनोज कुमार का कहना है कि रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी है। इसमें चेयरपर्सन सहित तत्कालीन कई अधिकारी भी दोषी हैं।

यह है मामला
भाजपा जिलाध्यक्ष सतीश खोला, पूर्व चेयरमैन एवं पार्षद विजय राव व पार्षद विनीता पोपाली ने नगर निकाय मंत्री से लेकर निकाय अधिकारियों तक से 10 अगस्त को लिखित शिकायत भेजी थी। जिसमें उन्होंने बताया था कि नगर परिषद की ओर से 19 मई, 2015 को जेसीबी मशीन की सर्विस कराया जाना दिखाया गया, जिस पर एक लाख 15 हजार रुपये खर्च कर दिए। 22 नवंबर, 2014 को जेसीब मशीन व डंपर किराए पर लिए गए, जिन पर दो लाख 83 लाख सौ रुपये खर्च किया जाना दिखाया गया। 20 नवंबर, 2014 को जेसीबी किराये पर लेकर सहारनवास कूड़ा घर व अन्य जगह चलाया गया, लेकिन इसका खर्च नहीं दिखाया गया। इसी प्रकार सहरानवास कूड़ाघर में ही कार्य करने के लिए 19 दिसंबर, 2012, 19 जनवरी, 2015, 30 जनवररी, 2015 को भी सहारनवास कूड़ा घर पर जेसीबी चलाई गई, लेकिन इसका खर्च कहीं नहीं दिखाया गया।

सरकारी ग्रांट का ही नहीं कोई हिसाब, विजीलेंस जांच की सिफारिश
 एसडीएम की जांच में धारा-35 के तहत तो गड़बड़ी पाई गई ही है, साथ ही यहां कई और बड़े मामले सामने आए हैं। जिस पर एसडीएम ने इन सभी मामलों की जांच ऑडिट टीम या विजीलेंस से कराने की भी सिफारिश की है। सूत्रों के मुताबिक जांच में सामने आया है कि नगर परिषद में भारी गड़बड़ी हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार से मिलने वाली ग्रांट तक का परिषद में हिसाब नहीं है। कितनी ग्रांट आई और कहां खर्च की, इसकी जानकारी तक परिषद में नहीं है। बैंक एकाउंट में भी अनियमितता मिली है। एक खाते का पैसा दूसरे में डाल दिया तो किसी मद का पैसा किसी दूसरे मद में खर्च कर दिया गया। यहां तक कि नगर परिषद में रजिस्टर तक मेनटेन नहीं है।

वर्जन..
 मामले की जांच रिपोर्ट एसडीएम से मिलने के बाद नगर निकाय निदेशक को भेज दी है। कार्रवाई उन्हें ही करनी है। जांच में चेयरपर्सन के साथ तल्कालीन सचिव, एकाउंटेंट आदि भी दोषी पाए गए हैं।
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डॉ. यश गर्ग, उपायुक्त
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