प्रेसवार्ता करते डीएसपी सुभाष चंद साथ में थाना प्रभारी संजय कुमार।
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14 अगस्त की रात को मिला फोन, तब खुलीं हत्या की परतें
डीएसपी ने बताया कि आरोपी अंकित भालिया ने वारदात को बड़े ही सफाई से अंजाम दिया और घटना की रात को 1 बजे बाद व्यापारी का मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। इसके बाद 14 अगस्त की रात को व्यापारी का फोन एक ट्रक चालक के पास मिला ऑन होते ही सक्रिय पुलिस टीम ने रात को बिलासपुर पहुंचकर मोबाइल बरामद करने के साथ चालक से भी पूछताछ की। चालक ने बताया कि उसे यह उसके ट्रक में मिला।
मोबाइल को कब्जे में लेने के बाद जब पुलिस ने उसकी जांच शुरू की तो उसमें मंगत और अंकित के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग मिल गई। इसमें रुपये को लेकर अंकित और मंगत के बीच बातचीत के साथ उसे उत्तम नगर स्थित गोदाम में जाने की बात कही गई। इसके बाद पुलिस का शक यकीन में बदल गया कि पूरे मामले का मास्टरमाइंड अंकित भालिया ही है।
इसके बाद पुलिस अंकित भालिया के घर पहुंची तो पता चला कि वह यहां से निकल चुका है। तत्पश्चात पुलिस ने उसके यहां काम करने वाले उसके बुआ के बेटे मनोज कुमार को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लेने के बाद मनोज कुमार ने पूरी कहानी बयां करते हुए कहा कि व्यापारी की हत्या करके उसका शव उत्तम नगर स्थित गोदाम के एक छोटे कुएं (कुई) में दफना दिया गया है। इतना ही नहीं उस पर पक्की फर्श भी डाल दी गई है। हत्या की बात सामने आने के बाद पुलिस ने उसके दूसरे सहयोगी मोहल्ला मेहरवाड़ा निवासी दीपक उर्फ दीपु पंडित को भी हिरासत में ले लिया।
वारदात के बाद पंजाब भाग गया था आरोपी अंकित
उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों के हिरासत में आने के बाद पुलिस ने आरोपी अंकित भालिया की तलाश शुरू की तो उसके घर से भागने की जानकारी मिल गई। इसके बाद उसके मोबाइल की लोकेशन मिली तो वह भी बंद मिला। इस पर पुलिस ने अन्य तकनीकी सहायता से उसकी लोकेशन प्राप्त की तो पता चला कि वह पानीपत को पार कर चुका है। इस पर पुलिस ने पानीपत सहित अन्य जिलों को मैसेज चलवा दिया। इसके बाद भी आरोपी हरियाणा से निकलकर पंजाब के लुधियाना जिला में पहुंच गया, जहां की पुलिस को सूचना दी तो उसे पकड़ लिया गया। इसके बाद शहर थाना पुलिस की टीम ने आरोपी को अपनी हिरासत में ले लिया।
14 लाख की देनदारी के लिए की हत्या
डीएसपी ने बताया कि आरोपी अंकित भालिया अलवर निवासी व्यापारी मंगत अरोड़ा से मेटल का सामान लेता था। काफी समय से दोनों के बीच यह व्यापार होने के कारण मंगत अरोड़ा ने उसे उधार में माल दे दिया था, जिसके कारण उस पर बकाया पैसे बढ़ते चले गए। लगभग 10 दिन पहले भी उसने मंगत अरोड़ा को 2 लाख रुपये दिए थे, लेकिन उसके द्वारा फिर तकादा किया जा रहा था। इसके बाद 10 अगस्त को उसे बुलाया गया था और 14 लाख रुपये की देनदारी नहीं देने पड़े इसके लिए आरोपी मनोज और दीपक को पैसे देने का झांसा देकर दोनों को अपने साथ हत्या में शामिल कर लिया।