रेवाड़ी। रफ्तार के कहर ने एक बार फिर एक ही परिवार के छह लोगों की जिंदगी छीन ली। दिल्ली-जयपुर राजमार्ग संख्या आठ पर हादसे ने एक बार फिर तीन साल पहले प्राइवेट बस के ट्रक से टकराने के कारण हुई छह लोगों की मौत को ताजा कर दिया है। रविवार सुबह हुआ हादसा भी रफ्तार की वजह से ही हुआ जिसके कारण जयपुर जिला के छह लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी सदस्य एक ही परिवार के हैं जिसके बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मौके पर ही हो गई मौत
दुर्घटना इतनी भीषण की मृतकों के शरीर के हिस्से भी सड़क पर फैल गए। मूल रूप से जयपुर के शिवदासपुरा की ढाणी निवासी 35 वर्षीय चंपी कई सालों से दिल्ली के बदरपुर में अपने परिवार सहित रहकर परिवार का गुजर बसर कर रहा था। शुक्रवार रात को वह अपनी 32 वर्षीय पत्नी अनिता, दो वर्षीय बेटे आर्यन, लिच्छा देवी व अपने मित्र जीतावाला दिल्ली निवासी 24 वर्षीय सुनील व उसकी 21 वर्षीय पत्नी रेखा के साथ जयपुर के समीप नाईका धाम के दर्शन करने के लिए गए थे। शनिवार को सभी ने धाम के दर्शन करने के बाद उसने शिवदासपुरा निवासी अपने साले 25 वर्षीय नरेश का बुला लिया और उसकी एसेंट कार में सवार होकर रात को ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए। कार को चंपी स्वयं चला रहा था। कार की रफ्तार तेज होने के कारण बावल के समीप जयसिंहपुर खेड़ा बैरियर के समीप टायर फटने के बाद उसने कार से नियंत्रण खो गया। इसके बाद कार दूसरी लेन में दिल्ली की तरफ से आ रहे ट्रक में जा टकराई। हादसा इतना भयंकर था कि कार में सवार लोगों के मांस के टुकड़े सड़क पर फैल गए और छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास के लोगों मदद से कार में फंसे लोगों को बाहर निकाल कर बावल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां लिच्छम देवी को रोहतक रैफर कर दिया गया। इसके अलावा कार में सवार सभी लोगों को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
मनौती मांगने गया था चंपी
घटना के बाद सीएचसी बावल पहुंचे चंपी के भाई लक्ष्मण ने बताया कि चंपी अपने परिवार के साथ दिल्ली के बदरपुर में रहता था। वह बहुत धार्मिक प्रवृति का इंसान था। उसके दो बेटे थे। वह नाई का धाम को बहुत मानता था। उसका मानना था कि उसके बच्चे और परिवार का भरण पोषण धाम की बदौलत ही हो रहा है। वह अन्य लोगों को भी धाम की यात्रा कराता था। शुक्रवार को भी वह जयपुर के समीप से पैदल यात्रा कर पत्नी, बेटे व अन्य लोगों के साथ नाई का धाम के दर्शन के लिए गया था। वह अपने परिवार के साथ खुश था। धाम के दर्शन करने के लिए वह अक्सर जयपुर जाता रहता था।