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खाकी के लिए तमंचे से ज्यादा बड़ी चुनोती बनी बुलेट

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पुलिस के लिए तमंचे से बड़ी चुनौती बनी बुलेट
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-जनवरी महीने में हो चुकी है दर्जनभर फायरिंग की वारदात
-कट्टे, पिस्तौल, तमंचे देसी फैक्टरी में बनना संभव, बुलेट (गोली) नहीं, पता लगाना पुलिस के लिए बना सिरदर्द
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प्रीतम सिंह
रेवाड़ी। जिले में आए दिन बदमाशों के बीच हो रही फायरिंग की घटनाओं से पुलिस की दौड़-धूप बढ़ गई है। एक का खुलासा नहीं होता तब तक दूसरी फायरिंग की वारदात हो जाती है। जनवरी महीने में दर्जनभर फायरिंग की वारदात हो चुकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि मेवात के अलावा यूपी और बिहार में बड़ी मात्रा में तमंचे और देसी पिस्तौल बनाई जाती हैं लेकिन बुलेट यानी गोली को किसी देसी फैक्ट्री में नहीं बनाया जा सकता। पुलिस भी इससे इनकार नहीं कर रही। ऐसे में बदमाश गोलियां कहां से हासिल कर रहे हैं, इसका पता लगाना पुलिस के लिए सिरदर्द बना है। सूत्रों की मानें तो कुछ गन हाउस या फिर लाइसेंस धारक विक्रेता गोलियों को अवैध रूप से अधिक दाम पर बेच रहे हैं।
-अपराधी पकड़े जा रहे पर रुक नहीं रही वारदात
फायरिंग के कई मामलों में पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने में कामयाब हुई है। इसके बावजूद फायरिंग और अन्य आपराधिक वारदात लगातार बढ़ रही हैं। इसका बड़ा कारण ये भी माना जा रहा है कि पुलिस आरोपी को असलहा समेत गिरफ्तार तो कर लेती है, लेकिन पिस्तौल के लिए गोली कहां से आई, इसकी जांच में ढिलाई बरत रही है।
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-ये हुई वारदातें
-एक जनवरी की रात को बस स्टैंड के सामने पिस्तौल दिखाकर युवक से लूटपाट
-दो जनवरी को गांव गादला में पिस्तौल दिखाकर युवक को धमकी
-तीन जनवरी को हाईवे स्थित सालावास कट पर पिस्तौल से फायर कर युवक से लूटपाट
-पांच जनवरी को पांचोर गांव में फायरिंग कर सुअर चोरी
-सात जनवरी को आसलवास में फायरिंग
-आठ जनवरी को जाटूसाना में पिस्तौल और कारतूस सहित युवक काबू
-बारह जनवरी की रात को बाइक सवार युवक पर फायरिंग
-पंद्रह जनवरी को भीम बस्ती में फायरिंग
-बीस जनवरी को सीआईए टीम पर बदमाशों द्वारा फायरिंग
-31 जनवरी को माडल टाउन मेें जुवेनाइल कोर्ट के बाहर सीआईए टीम पर फायरिंग
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पुलिस अवैध हथियारों सहित बदमाशों का गिरफ्तार कर रही है। बदमाश अवैध पिस्तौल, तमंचे, कट्टे और गोलियां मुहैया कराने वालों की जांच कर रही है। जल्द खुलासा किया जाएगा।
सतपाल, डीएसपी रेवाड़ी।
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