संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश गुप्ता की अदालत ने पॉक्सो एक्ट के तहत अभिरक्षा में लिए गए एक किशोर को मानवीय आधार पर 13 दिनों के लिए अंतरिम जमानत दी है। आरोपी किशोर की मां की हाल ही में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। ऐसे में आरोपी की ओर से शोक कार्यक्रम के लिए 13 दिनों की अंतरिम जमानत की अर्जी दी गई थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि यह जीवन की अत्यंत संवेदनशील अवस्था है। मां का साथ छूटना एक बड़ा आघात होता है। अपने परिवार के साथ मातृशोक में शामिल होना आरोपी का नैतिक और मानवीय अधिकार है।
अदालत ने उच्च न्यायालय की ओर से पूर्व में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि कैदियों को आवश्यक पारिवारिक अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यह आदेश न्यायिक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का प्रतीक माना जा रहा है।
किशोर के अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया था कि अभी आरोपी बाल सुधार गृह में है। उसकी मां कि सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। किशोर 2023 से हिरासत में है। अपनी मां का अंतिम संस्कार करने के लिए किशोर की उपस्थिति आवश्यक है। अनुरोध किया कि मानवीय आधार पर मां का अंतिम संस्कार करने के लिए 13 दिनों की अंतरिम जमानत दी जाए।
राज्य की तरफ से दाखिल जवाब में पुष्टि की गई कि किशोर की मां की मौत हो गई है। किशोर के अधिवक्ता ने कहा कि अभियोजन पक्ष के अधिकांश गवाहों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है। उन्होंने अनुरोध किया कि इन परिस्थितियों में अदालत को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।