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Rewari News: डिजिटल अरेस्ट कर दंपती से 1.89 करोड़ ठगे, मानसिक प्रताड़ना से आत्महत्या तक का आया ख्याल

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धारूहेड़ा।
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साइबर ठगों ने पुलिस, ट्राई और सीबीआई अधिकारी बताकर एक दंपती को डिजिटल अरेस्ट कर करीब दो महीनों तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और 1.89 करोड़ रुपये ठग लिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित के रिश्तेदार घर पहुंचे और स्थिति को समझा। पीड़ित का कहना है कि वह तो आत्महत्या करने के बारे में सोच रहे थे।
सेक्टर-6 धारूहेड़ा निवासी पीड़ित राजपाल सिंह नेवी से रिटायर्ड हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 27 और 28 फरवरी को उनके मोबाइल पर अज्ञात नंबरों से कॉल आई। कॉल करने वालों ने खुद को ट्राई और मुंबई पुलिस से जुड़ा अधिकारी बताया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि राजपाल के नाम पर अवैध सिम खरीदी गई है और उससे अश्लील फोटो, वीडियो और आपत्तिजनक संदेश भेजे जा रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ मुंबई में एफआईआर दर्ज है।
इसके बाद कॉल को एक कथित एसएचओ और फिर खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर बताने वाले व्यक्ति से जोड़ा गया जिसने राजपाल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल बताते हुए सख्त कार्रवाई की धमकी दी। ठगों ने दावा किया कि बड़े कारोबारी के साथ जुड़े मामले में उनका नाम सामने आया है और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।
इस दौरान आरोपियों ने लगातार डर और दबाव बनाते हुए सामाजिक बदनामी, गिरफ्तारी और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। ठगों ने दंपती को अपने नियंत्रण में रखने के लिए डिजिटल अरेस्ट का तरीका अपनाया। उन्होंने राजपाल और उनकी पत्नी से सिग्नल एप डाउनलोड करवाया और 24 घंटे वीडियो कॉल चालू रखने को कहा।
उन्हें घर से बाहर जाने, किसी से बात करने या फोन इस्तेमाल करने के लिए भी फर्जी इंस्पेक्टर से अनुमति लेने को कहा गया।

बैंक खातों, संपत्ति, गहनों की जानकारी ली
मानसिक दबाव और धमकियों के चलते दंपती पूरी तरह से भयभीत हो गया। इस दौरान ठगों ने उनके बैंक खातों, संपत्ति, गहनों और आय के स्रोतों की पूरी जानकारी हासिल कर ली। फिर अलग-अलग तारीखों में विभिन्न बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवानी शुरू कर दी।
अलग-अलग दिन खातों में डलवाई राशि
शिकायत के अनुसार 3 मार्च को शेख अमीर के खाते के नाम 90 हजार रुपये, 5 मार्च को 17.50 लाख रुपये, 11 मार्च को दो अलग-अलग खातों में 21.50 लाख और 15 लाख रुपये, 16 और 17 मार्च को करीब 11 लाख और अन्य रकम, 25 और 26 मार्च को करीब 33 लाख रुपये, 2 अप्रैल को 29.5 लाख रुपये तथा 17 और 18 अप्रैल को कई किश्तों में लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। 20 अप्रैल को भी 10 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। इस तरह कुल 1.89 करोड़ रुपये की ठगी की गई।
पीड़ित ने अपनी संपत्ति, प्लॉट, दुकान और गहने तक बेच दिए
ठगों ने भरोसा बनाए रखने के लिए फर्जी कोर्ट, पुलिस दस्तावेज, ऑनलाइन रसीदें और वीडियो भी भेजे। यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी संपत्ति की जांच होगी और यदि वे संपत्ति बेचते हैं तो 70 प्रतिशत राशि सरकारी खाते में जमा करनी होगी। इसी झांसे में आकर पीड़ित ने अपनी संपत्ति, प्लॉट, दुकान और गहने तक बेच दिए।
मानसिक रूप से टूटा दंपती
दो महीने तक चले इस पूरे घटनाक्रम में दंपती मानसिक रूप से इतना टूट गया कि उन्हें समझ ही नहीं आया कि वे क्या करें। ठगों ने धमकी दी कि यदि उन्होंने किसी को जानकारी दी या चैट डिलीट नहीं की तो जान से मार दिया जाएगा। डर के कारण उन्होंने सभी चैट और मैसेज भी डिलीट कर दिए। पीड़ित के रिश्तेदार घर पहुंचे तो मामले का खुलासा हुआ।
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वर्जन
पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है। साथ ही आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। लोगों से अपील है कि किसी भी अनजान कॉल, विशेषकर खुद को पुलिस, सीबीआई या सरकारी एजेंसी बताने वाले व्यक्तियों के झांसे में न आएं। किसी भी स्थिति में दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत नजदीकी थाना या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
जितेंद्र तंवर, जांच अधिकारी
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