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हाईवे पर कांवड़ियों के लिए गलियारा और सुरक्षा व्यवस्था नदारद

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हाईवे पर बगैर सुरक्षा गलियारे के जाते कांवड़िये। - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। प्रशासन व पुलिस के तमाम दावों के बावजूद दिल्ली-जयपुर हाईवे पर कांवड़ियों के लिए गलियारा, सुरक्षा और स्वास्थ्य शिविर की कोई भी व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई है। इसके चलते कांवड़ियों में काफी रोष भी है। आए दिन हो रहे हादसे कांवड़ियां परेशान हैं। सोमवार को जब धारूहेड़ा के कापड़ीवास बॉर्डर से लेकर जयसिंह खेड़ा बॉर्डर तक जायजा लिया गया तो पाया गया कि कांवड़ियों के लिए न तो कोई अलग से कोई सुरक्षा गलियारा बनाया गया है और न ही पुलिस तैनात की गई थी। इसके अलावा बात करें स्वास्थ्य शिविर की ऐसी भी कोई व्यवस्था वहां पर दिखाई नहीं दी, जबकि बीते 10 दिन से लगातार प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के पूरे करने के दावे किए जा रहे हैं। रेवाड़ी पुलिस की ओर से भी दावा किया गया था कि नेशनल हाईवे पर अलग से सुरक्षा लाइन बनाई जाएगी, वहीं मेडिकल टीम की भी लगाई जाएगी, लेकिन ऐसा कहीं पर भी दिखाई नहीं दिया।
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जिला प्रशासन की ओर कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर बहुत से कई दावे किए गए थे, लेकिन सभी दावे धरे के धरे रह गए। प्रशासन की ओर से जिले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए गए थे। दिल्ली-जयपुर हाईवे नंबर-48, रोहतक-बावल हाईवे नंबर-352 व रेवाड़ी-नारनौल हाईवे नंबर 11 पर कांवड़ियों के चलने व सुरक्षा के लिए बाईं ओर रस्सी लगाकर, अगल से रास्ता बनाने के आदेश जारी किए गए थे। इसके अतिरिक्त पुलिस की पीसीआर भी लगातार गश्त पर रहने को लेकर आदेश थे। मुख्य प्वाइंटों पर ट्रैफिक पुलिस के जवानों को लगाने का दावा भी फेल हो गया।
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राजमार्ग पर लगी है कांवड़ियों की भीड़
कांवड़ लेकर लौटने वाले कांवड़ियों की लंबी कतार भक्तिपूर्ण माहौल का अहसास करा रही है। दिल्ली से धारूहेड़ा, बावल रोड की ओर के राजमार्ग पर हरिद्वार व गोमुख से चलकर बावल, राजस्थान के विभिन्न जिलों की ओर पैदल जाने वाले कांवड़ियों का तांता लगा हुआ है। जगह-जगह सेवा शिविर लगाए हुए हैं। इनमें शिवभक्तों द्वारा गांव आसलवास, बनीपु र चौक, खेड़ा बार्डर तक जल पान और रात्रि विश्राम के साथ कांवड़ियों के लिए स्वास्थ्य जांच की भी सुविधा उपलब्ध है। बहुत से श्रद्धालु झूला कांवड़ लेकर आए हैं। जो अपना पड़ाव डालते समय सहायता शिविरों में लकड़ी की बल्लियां बांधकर कांवड़ रखने की व्यवस्था की गई है।
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एनएच-8 पर 9 स्थानों पर हादसे की रहती है आशंका , सुरक्षा नाकाफी
दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर 9 स्थानों पर कापड़ीवास, बणीपुर चौक, ओढ़ी कट, जयसिंह पुर खेड़ा, संगवाड़ी, असाही पुल, भूड़ला, साहबी पुल और साबन चौक पर हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। इसी तरह कापड़ीवास से भिवाड़ी की तरफ जाने वाला टर्न भी बड़ा ब्लैक स्पॉट जहां पर फ्लाईओवर के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अन्य स्थानों पर इसी तरह अवैध कट सहित संपर्क सड़कें मिल रही है जो कि बड़े ब्लैक स्पॉट बनाती है। दूसरे नंबर की बात करें तो एनएच-11 की बजाय अब महेंद्रगढ़ रोड मुख्य बनता जा रहा है। यहां पर तीन ब्लैक स्पॉट है। एनएच-71 पर गुरावड़ा और पाल्हावास बड़े ब्लैक स्पॉट है जिन पर भी काम होना है।
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सोनीपत में हुई रेवाड़ी के कांवड़िये की मौत
सोनीपत में हुए हादसे में घायल रेवाड़ी के कांवड़िये आशीष की रविवार को रोहतक पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह 22 जुलाई को हरिद्वार से कांवड़ लेकर चला था और सुबह परिजनों के हादसे में घायल होने और फिर उसकी मौत की जानकारी मिली। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है।
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कापड़ीवास के पास कैंटर की टक्कर से दो कांवड़िये घायल
दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर कापड़ीवास गांव के निकट शनिवार की रात को एक कैंटर वाहन की टक्कर से पैदल चल रहे दो कांवडिये घायल हो गए। दोनों घायलों को एक निजी अस्पताल में उपचार कराकर गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात कैंटर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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शिवरात्री को लेकर शिवालयों में तैयारियां प्रारंभ:
भगवान शिव के पवित्र सावन माह में शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है। सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों की लाइन लगनी आरंभ हो गई थी। मंदिरों में सुबह से भजन कीर्तन और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम जारी रहा। मंगलवार को शिवरात्रि को लेकर मंदिरों में व्यापक तैयारियां की गईं हैं। कांवड़ियों को जलाभिषेक करने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो इसके लिए मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों की जिम्मेदारियां लगाई गई हैं। इसके अलावा पुलिस कर्मचारियों की भी मंदिरों के आसपास ड्यूटियां लगाई गईं हैं।
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क्या बोले कांवडिये:
हाईवे पर सुरक्षा गलियारा तक नहीं
कापड़ीवास बॉर्डर से अंदर आने के बाद जिला प्रशासन की ओर से कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर कोई भी गलियारा नहीं बनाया गया। यहीं नहीं मेडिकल की टीम तक नजर नहीं आई। पुलिस के जवान भी गुरुग्राम में दिखे थे, लेकिन यहां पर कोई भी नहीं दिखाई दिया।
- दशरथ, कांवड़िया, बानसूर जिला अलवर
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धारूहेड़ा से पहले थी व्यवस्था
हरिद्वार से कांवड़ लेकर आए है। प्रशासन की ओर से आपके जिले में कोई भी व्यवस्था नहीं दिखी। धारूहेड़ा से पहले गुरूग्राम जिले में जरूर प्रबंध दिखे थे। हाईवे पर चलते समय खतरा बन जाता है। ऐसे में प्रशासन को कांवडियों के बारें में कुछ सोचना चाहिए।
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- महेश सिंह, कांवड़िया बानसूर जिला अलवर
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वर्जन:
हाईवे पर कांवड़ियों के लिए गलियारा, सुरक्षा और स्वास्थ्य शिविर की व्यवस्था की जांच की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसपी से भी कहूंगा।
-अशोक कुमार गर्ग, डीसी
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