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Rewari News: सड़क हादसे में संदीप राव की मौत पर 37.05 लाख का मुआवजा

Sat, 23 May 2026 06:06 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मीरपुर निवासी संदीप राव के परिजनों को 37.05 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। यह फैसला 22 मई को अधिकरण के पीठासीन अधिकारी जतिन गर्ग ने सुनाया। अदालत ने दुर्घटना के लिए कार चालक को लापरवाह मानते हुए बीमा कंपनी को मुआवजा राशि अदा करने के निर्देश दिए।
याचिका मृतक संदीप राव की पत्नी आरती यादव, मां कृष्णा देवी और पिता कंवर सिंह की ओर से दायर की गई थी। परिवार ने दावा किया था कि 7 जून 2020 को संदीप राव साथियों के साथ टाटा हैरियर गाड़ी में झज्जर से दिल्ली की ओर जा रहे थे। जब उनकी गाड़ी गांव रैय्या और गिजरोड़ के बीच पहुंची तो सामने से तेज रफ्तार आ रही कार ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी।
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टक्कर इतनी जोरदार थी कि टाटा हैरियर अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में संदीप राव गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें सिविल अस्पताल झज्जर ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने अदालत को बताया कि संदीप राव की उम्र करीब 24 वर्ष थी और वह सीएचसी मीरपुर में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। इसके अलावा वह कृषि कार्य से भी आय अर्जित करते थे। परिवार ने करीब एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की थी।
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इस तरह लगाया गया आय का आकलन
मृतक की आय का आकलन करते हुए अदालत ने उनकी मासिक आय 18 हजार रुपये मानी। भविष्य की आय को ध्यान में रखते हुए 40 प्रतिशत अतिरिक्त राशि जोड़ी गई। इसके बाद व्यक्तिगत खर्च घटाकर कुल निर्भरता हानि की गणना की गई। अदालत ने 18 का मल्टीप्लायर लागू करते हुए परिवार को 36.28 लाख रुपये निर्भरता हानि के रूप में दिए। इसके अलावा अदालत ने परिवार को 44 हजार रुपये कंसोर्टियम, 16,500 रुपये अंतिम संस्कार खर्च और 16,500 रुपये संपत्ति हानि के रूप में भी प्रदान किए। इस प्रकार कुल मुआवजा राशि 37 लाख 5 हजार 800 रुपये तय की गई। अदालत ने आदेश दिया कि मुआवजा राशि पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाएगा जो याचिका दायर करने की तारीख से लागू होगा। कुल राशि में से 60 प्रतिशत हिस्सा मृतक की पत्नी को और 20-20 प्रतिशत हिस्सा माता-पिता को मिलेगा।
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बीमा कंपनी ने किया था ये दावा
बीमा कंपनी ने दावा किया था कि वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था लेकिन अदालत में पेश दस्तावेजों से साबित हुआ कि वाहन बीमित था और चालक का लाइसेंस भी वैध था। इसके बाद अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजा राशि जमा कराने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान अदालत में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए गए। गवाहों ने बताया कि हादसा कार चालक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग के कारण हुआ। अदालत ने माना कि दुर्घटना के लिए कार चालक जिम्मेदार था।
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