प्रदेश में ईमानदारी के लिए चर्चित सीएम मनोहरलाल खट्टर की ओर से बांटी गई लाखों रुपये की ग्रांट जिले में उस संस्था को दी गई जिसका जमीन पर कहीं अस्तित्व ही नहीं है। अमर उजाला संवाददाता ने मिली ग्रांट पर जब पड़ताल की तो पता चला कि अनाज मंडी की जिस दुकान (नंबर 52) पर यदुवंशी सोसायटी फॉर एजुकेशनल मिशन संस्था को दिखाकर 5 लाख रुपये की ग्रांट उठाई है उसके मालिक को इस संस्था के बारे में पता ही नहीं है। हैरानी की बात यह है कि ग्रांट पास होने और लिए जाने से पहले प्रशासन की ओर से किसी तरह की वेरीफिकेशन ही नहीं की जाती है।
मेंटिनेंस और किताबों के लिए मांगी रकम
सीएम से मांगी गई ग्रांट में तथाकथित रूप से नई अनाज मंडी की दुकान नंबर 52 स्थित यदुवंशी सोसायटी फॉर एजुकेशनल मिशन संस्था के हॉल, कमरों की रिपेयरिंग करने और संस्था की लाइब्रेरी के लिए किताबें खरीदने के लिए 5 लाख रुपये की राशि मांगी गई थी। लेकिन हकीकत यह थी कि नई अनाज मंडी में सिर्फ गेहूं के बोरों का गोदाम था। न कहीं हॉल व कमरे और न ही कहीं लाइब्रेरी।
मार्च में रकम हुई पास, मई में निकाली
सीएम से मांगी गई रकम को राज्य सरकार के डेवलपमेंट एंड पंचायत डिपार्टमेंट की ओर से ग्रांट देने का लेटर जिला प्रशासन को मिला। मार्च 2016 को जिला उपायुक्त की ओर से ग्रांट अप्रूव्ड हो गई और बाद में मई 2016 को किसी शख्स ने 5 लाख रुपये निकाल भी लिए।