फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महंगाई पर महिलाएं बोलीं- पहले 100 रुपये में भरता था थैला, अब नहीं मिलती एक वक्त की सब्जी

विज्ञापन
दुकान पर रखी सब्जियां - फोटो : Rewari
विज्ञापन
देश में खुदरा महंगाई सूचकांक पांच साल में शीर्ष पर रहने का असर शहर की सब्जी मंडी से लेकर लोगों की रसोई तक में दिखाई दे रहा है। एक वर्ष पहले जो पालक छह रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही थी, इस वर्ष उसकी कीमत 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है।
विज्ञापन

गृहिणियों का कहना है कि आय में बीते वर्षों में कमी आई है। महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। बढ़ती महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। महिलाओं का कहना है कि बीते सालों में जहां मौसमी सब्जियां 100 रुपये में थैला भरकर आ जाती थी, अब इतने ही पैसे में एक वक्त की भी सब्जी नहीं मिल पा रही हैं। जिला में पिछले पांच वर्षों में सब्जी का रकबा लगातार घट रहा है। स्थानीय किसान भी पिछले तीन-चार वर्षों से सब्जियों के भावों में चली लगातार गिरावट के कारण सब्जियों की खेती से मुंह फेर चुके हैं। ऐसे में जिला की सब्जी मंडियों में आने वाली स्थानीय किसानों की सब्जी बहुत कम मात्रा में आ रही है जो भाव बढ़ने के मुख्य कारणों में एक है।
थैले में आने वाली सब्जी किलो में निपटी : नीरू
ग्रहणी नीरू यादव ने बताया कि सब्जियों के दामों में लगातार हो रही वृद्धि ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पहले जहां सब्जी मंडी में 100 रुपये में एक सप्ताह की सब्जी आसानी से खरीद लेते थे, अब वह केवल किलो तक सिमट कर रह गई हैं।
विज्ञापन

मौसम के अनुसार सस्ती नहीं हो रही सब्जी : मनीषा यादव
मनीषा यादव ने बताया कि पहले मौसमी सब्जी सस्ते दामों में मिल जाती थी। लेकिन अब मौसमी सब्जियों के भाव भी आसमान छू रहे रहे हैं। ऐसे में रसोई का बजट बिगड़ रहा है।
फ्री मिलने वाले धनिये की जुट्टी पहुंची 30 रुपये के पार : सुुुरभी शर्मा
सुरभी शर्मा ने बताया कि पहले जहां सब्जियों की खरीद पर दुकानदारों एवं रेहड़ी वालों द्वारा धनिया फ्री दिया जाता था। अब धनिया की जुट्टी 30 रुपये में मिल रही है। हर वर्ष सब्जियों के बढ़ते दाम विशेषकर ग्रहणियों के लिए चिंता का विषय है।
इस साल नहीं हुई सब्जी की कीमतें कम : कल्पना
ठंड के मौसम में आम तौर पर सब्जियों की कीमत कम हो जाती है, लेकिन इस साल ऐसा नहीं नजर आ रहा। आधा जनवरी बीत चुका है और आलू-प्याज सहित हरी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं।
रसोई से दूर हो रहा प्याज : सीमा धींगड़ा
सीमा धींगड़ा ने बताया कि प्याज के बढ़ते दामों के कारण अब यह रसोई से दूर होता जा रहा है। पिछले साल जहां 10-15 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से प्याज मिल रहा था। इस बार यह 150 तक पहुंच गया। ऐसे में रसोई से प्याज गायब हो गया है।
प्याज खरीदे बिना ही निकाले आंसू : सुमन
ग्रहणी सुमन ने बताया कि प्याज आंसू निकाल रहा है तो टमाटर और भी लाल हो गया है। अक्सर प्याज काटते समय आंखों में आंसू आ जाते हैं, लेकिन इस समय प्याज की महंगाई इतनी बढ़ गई है कि प्याज खरीदे बिना ही आंख से आंसू निकलने को तैयार हैं। पिछले कुछ दिनों में प्याज के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है। ब्याज के दाम ऐसे बढे़ कि प्याज इस समय सलाद से भी गायब हो गई है।
सीजनल सब्जियां भी हुई महंगी : कलावती
कलावती ने बताया कि ठंड की शुरुआत के साथ ही न फसलों की आवक जोर पकड़ने से अक्सर सब्जियों के दाम में नरमी आती है, लेकिन इस साल अब तक ऐसा नहीं हुआ है। प्याज के दाम पहले ही आसमान छू रहे थे, अब सीजनल सब्जियां भी काफी महंगी हो गई हैं। सबसे ज्यादा आलू के दाम चौंका रहे हैं। यह 30-40 रुपये किलो में बिक रहा है। वहीं, गाजर-मूली के दाम भी 20 से 25 रुपये प्रति किलो हो गए हैं।
छह रुपये प्रति जुट्टी वाला पालक पहुंचा 20 के पार : रेखा
ग्रहणी रेखा ने बताया कि पिछले साल छह रुपये प्रति जुट्टी मिलने वाली पालक अब 20 रुपये के पार हो गया है। प्याज ही नहीं सब्जियों के भाव भी आसमान छू रहे हैं। आम आदमी की जेब पथर सब्जियां अतिरिक्त बोझ डाल रही हैं। जितने पैसों में कुछ साल पहले सप्ताहभर की सब्जी मिल जाती थी उतने में अब दो दिन की भी नहीं मिल पा रही है। इसलिए लोगों के हर माह के बजट से ज्यादा पैसे खर्च हो रहे हैं। जिससे बजट गड़बड़ा रहा है।
पांच रुपये किलो मिलने वाली मूली हुई 15 के पार : संतोष
संतोष ने बताया कि पिछले साल पांच रुपये प्रति किलोग्राम मिलने वाली मूली ही इस बार 15 रुपये किलो तक पहुंच गई है। इस वर्ष सब्जियों के दामों में भारी वृद्धि हुई है। पहले जहां 40 रुपये किलो अदरक मिलती है वही अब दोगुने भाव में मिल रही है। सब्जियों के बढ़ते दामों के कारण अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
स्थानीय उपज कम होने से बढ़े भाव : सब्जी मंडी प्रधान
सब्जी मंडी प्रधान हंसराज पोसवाल ने बताया पिछले वर्षों की तुलना में इस बार स्थानीय सब्जी नहीं पहुंचने से भावों में वृद्धि हुई है। पिछले वर्षों में नवंबर से मार्च माह के बीच स्थानीय किसानों की सब्जी मंडी में पहुंच जाती थी। लेकिन इस बार यह आवक केवल नाममात्र ही रह गई है।
स्थानीय किसानों का सब्जी का रकबा हो रहा कम : किशनलाल चावला
सब्जी मंडी के थोक विक्रेता सेठ किशनलाल ने बताया कि स्थानीय किसानों का सब्जी का रकबा लगातार कम होता जा रहा है। पहले जहां जिला में अधिकांश सब्जी की आपूर्ति स्थानीय किसानों द्वारा लाई गई सब्जी से हो जाती थी। लेकिन पिछले दिसंबर माह में हुई ओलावृष्टि से भी जिला में सब्जी की खेती प्रभावित हुई है।
विज्ञापन

पिछले वर्ष के भावों के आंकड़ों की बात करें तो इस वर्ष सब्जी के भावों में काफी वृद्धि हुई है।
सब्जी भाव अब पिछले वर्ष
आलू - 20 10-12
टमाटर- 20 8-10
प्याज- 50 15-20
गाजर- 20 8-10
गोभी- 20 5-6
मटर- 40 15-20
खीरा- 25 10-12
शलगम- 30 8-10
अदरक- 80 35-40
मूली- 15 4-5
बैंगन- 30 10-15
पालक- 20 6-7
धनिया- 30 8-10
चप्पल टींडा- 50 15-18
मिचीब़- 40 15-20
नींबू- 40 30-35
चुकंदर- 30 10-12
रुपये प्रति किलोग्राम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें