संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। कस्बे में स्थित जर्जर ऐतिहासिक सराय भवन सरकारी स्कूल चल रहा है। इसी भवन में कक्षाएं चलती हैं। भवन जर्जर होने से हादसे की आशंका बनी रहती है।
अंग्रेजों के समय में सराय में बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने की व्यवस्था की जाती थी। मौजूदा समय में भवन की हालत काफी खराब हो चुकी है जिससे हादसे की आशंका जताई जा रही है। कुछ माह पहले 6 लाख रुपये मरम्मत के लिए खर्च किए गए थे। भवन इस कदर जर्जर है कि इसे दुरुस्त करने पर लाखों रुपये खर्च होंगे। ऐसे में विद्यार्थी जान हथेली पर रखकर पढ़ने को मजबूर हैं। अभी इस भवन में कक्षा पांचवी तक स्कूल चलाया जा रहा है। इस भवन में पहले ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का भी कार्यालय था। अब इसे बदलकर दूसरी जगह पर शिफ्ट कर दिया गया है। फिलहाल भवन को दुरुस्त करने के लिए शिक्षा विभाग की तरफ से कोशिश की जा रही है। इसके लिए बजट बनाकर भेजा गया है। अनुमति मिलने के बाद ही भवन को नया रूप मिल सकेगा।
तत्कालीन कैबिनेट मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने सराय का निरीक्षण कर उसका सुंदरीकरण करने का आदेश दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन का अस्तित्व बचाना बहुत जरूरी है। क्योंकि यह ऐतिहासिक धरोहर है। हेड मास्टर समुंद्र सिंह ने बताया की 6 लाख रुपये मिले थे, जिनसे तीन कमरों की मरम्मत का काम किया गया है। अभी यहां पर पहली से पांचवीं तक के लगभग 250 बच्चे पढ़ रहे हैं। बाकी छठी से आठवीं तक के बच्चे अभी भी पुरानी तहसील में पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि दस लाख रुपये की और जरूरत है, जिससे कुछ और कमरों की मरम्मत हो सके।
वर्जन:
स्कूल के मरम्मत का एस्टीमेट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। बजट पास होने के बाद कार्य शुरू करा दिया जाएगा। फिलहाल अभी प्रक्रिया चल रही है।-राजबाला, खंड शिक्षा अधिकारी