श्री गुरु रविदास मंदिर में आयोजित बैठक में समाज की एकता और सामूहिक सहमति को लेकर विचार-विमर्श क
रेवाड़ी। श्रीगुरु रविदास मंदिर में हरियाणा प्रदेश चमार महासभा की जिला इकाई के संयोजन में अनुसूचित जाति से संबंधित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों की बैठक हुई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाज की सामूहिक सहमति के बगैर पहचान में बदलाव स्वीकार नहीं है।
राज्य प्रधान शिवलाल दहिया की अध्यक्षता में आयोजित बैठक का संचालन अधिवक्ता राजकुमार ‘जलवा’ ने किया। जिला प्रधान अजीत सिंह ने बताया कि बैठक में सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को लेकर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान 23 अगस्त को बावल में मेघवाल उत्थान समिति के प्रतिभा प्रोत्साहन समारोह में समाज के नाम में बदलाव संबंधी उठाई गई मांग पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज के नाम, पहचान और भविष्य से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले सभी वर्गों, सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध लोगों के साथ व्यापक विचार-विमर्श तथा सामूहिक सहमति जरूरी है। अधिकांश प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे निर्णय संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के आधार पर ही लिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी मांग को आगे बढ़ाने से पहले सभी सामाजिक संगठनों की राय ली जानी चाहिए। बैठक में कहा गया कि मतभेदों को सामाजिक विभाजन का कारण नहीं बनने दिया जाएगा। समाज के सभी संगठनों और जिम्मेदार लोगों से आपसी संवाद बनाए रखने तथा भाईचारे को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर पूर्व तहसीलदार लाला राम नाहर, आरके डहीनवाल, अशोक नरवाल, चंदन सिंह जालवान, अनिल फांडन, भगत सिंह साम्भरिया, राजपाल सिंह दहिया, रामचंद्र रंगा लिसाणिया, सूबेदार मेजर सत्यनारायण साम्भरिया सहित अनेक लोगों ने विचार रखे।