रेवाड़ी। भूमि बंटवारा मामलों के शीघ्र निपटारे के उद्देश्य से व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आपसी सहमति से विवाद का समाधान कराने और मुकदमेबाजी कम करने के लिए एफसीआर ने वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र लागू किया है। इसके तहत संविदा आधार पर सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों की सेवाएं लेकर लंबित बंटवारा मामलों का निपटारा कराया जा सकता है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों की ओर से गांव स्तर पर विवादित पक्षों को आपसी सहमति से समाधान के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सहमति बनने के बाद संबंधित पक्ष विधिक क्रियान्वयन के लिए संबंधित राजस्व अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होंगे। इस व्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति सफल निपटारे पर 10 हजार रुपये का मानदेय स्वीकृत किया गया है, जिसे विवादित पक्ष समान रूप से वहन करेंगे।
डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भूमि बंटवारा कार्यवाही राजस्व अधिकारियों की सबसे महत्वपूर्ण वैधानिक जिम्मेदारियों में से एक है।
नए निर्देशों के तहत प्रत्येक सहायक कलेक्टर (द्वितीय श्रेणी) को प्रति माह न्यूनतम 12 बंटवारा मामलों का निपटारा अनिवार्य रूप से करना होगा। इन लक्ष्यों की कड़ाई से निगरानी के लिए तीन-स्तरीय मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है। अनुपालन की समीक्षा मासिक रूप से की जाएगी।
डीसी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी आदेशों का तत्काल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बंटवारा मामलों को राजस्व न्यायालयों के कार्यों में प्राथमिकता दी जाएगी और निर्धारित लक्ष्यों, समय-सीमाओं व प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।