रेवाड़ी। करीब तीन साल से पानी की राशनिंग झेल रही ढाई लाख की आबादी को अब राहत मिलने वाली है। जनस्वास्थ्य विभाग के जेई के अनुसार विभाग की ओर से नहरी पानी का शेड्यूल बदल जाने के कारण शहरवासियों को लगातार पानी की आपूर्ति देने का निर्णय लिया गया है। नहर में 24 दिनों के बाद 20 मार्च को पानी आना शुरू हुआ था, जो रविवार 4 अप्रैल को 16 दिन पूरे होने के बाद बंद हुआ। अब तीन दिन की देरी से 7 अप्रैल को फिर पानी आने की संभावना है। पहले यह शेड्यूल 16-24 का था, लेकिन अब 16-16 का कर दिया गया है।
गत दिनों रेवाड़ी विधायक चिरंजीव राव की ओर से विधानसभा में पानी की राशनिंग का मुद्दा उठाया गया था, जिसके बाद नहरी पानी का शेड्यूल बदला गया है। इससे पहले गर्मी हो या सर्दी, शहरवासियों को हर मौसम में पानी का संकट झेलना पड़ता था। राशनिंग के चलते एक दिन छोड़कर एक दिन पानी मिलता था। विभाग के जेई अजय यादव ने बताया कि रविवार को नहर में पानी आना बंद हो गया, लेकिन शहरवासियों को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े। इसके लिए पेयजल सप्लाई बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है। 7 अप्रैल को रेवाड़ी की नहर में पानी आएगा। अब तीन दिन स्टोरेज पानी के जरिए ही शहर को पेयजल सप्लाई की जाएगी।
रेवाड़ी शहर में पेयजल राशनिंग करीब तीन साल से चल रहा है। नहरी पानी का शेड्यूल पहले 16-16 दिन का था। यानी 16 दिन नहर में पानी आता था और 16 दिन नहर बंद रहती थी। तीन साल से शेड्यूल 16-24 का हो गया है। अब 16 दिन नहर में पानी आता था और 24 दिन बंद रहता थी। अब 20 मार्च को नहर में पानी आया था। जिसके बाद 24 दिनों के हिसाब से नहर में 12 अप्रैल को पानी आने का शेड्यूल था। लेकिन सरकार की ओर से शेड्यूल में बदलाव कर दिया है। अब 12 अप्रैल की जगह 7 मार्च को पानी आ जाएगा।
नहरी पानी पर आधारित है जलापूर्ति
शहर में नहरी पानी पर पेयजल सप्लाई आधारित है। नहर के पानी को कालका और लिसाना में बने वाटर टैंक में स्टोर किया जाता है। वहां से बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से शहर में पानी की सप्लाई होती है। पिछली बार मानसून में लोगों को पानी की समस्या से राहत मिली थी। उसके बाद सर्दी में भी पानी का संकट गहरा गया था।
शहरवासियों से अपील पानी को व्यर्थ न बहाएं
जन स्वास्थ्य विभाग के जेई अजय यादव ने बताया कि पानी की राशनिंग से छुटकारा जरूर मिला है, लेकिन लोगों को भविष्य के लिए पानी बचाए रखने के लिए व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि नहरी पानी आने तक पेयजल सप्लाई दी जा सके। नहरी पानी भी तय शेड्यूल से अक्सर देरी से ही आता है। ऐसे में व्यवस्था अभी से बनाकर रखी जानी आवश्यक है।
5 वाटर टैंकों से शहर के 70 फीसदी हिस्से में पेयजल की आपूर्ति
कालका जलघर में बनाए गए 5 वाटर टैंकों से शहर के 70 फीसदी हिस्से में पेयजल की सप्लाई होती है, जबकि लिसाना स्थित जलघर के दो वाटर टैंकों से 30 फीसदी भाग में पानी सप्लाई होता है। दोनों जलघरों से पूरे शहर को 15 से 20 दिन ही पानी सप्लाई हो सकती है। अब नए शेड्यूल के अनुसार 4 मार्च को नहर में पानी चलना बंद हुआ था और 7 अप्रैल को आने की संभावना है। यानि अब 16 दिन में नहर में पानी पहुंचेगा, जो शहरवासियों के लिए राहत की बात है।
भविष्य के लिए अतिरिक्त वाटर टैंक जरूरी
रेवाड़ी में गांव कालाका में 5 और लिसाना में 2 वाटर टैंक हैं। अतिरिक्त वाटर टैंक निर्माण के लिए कई बार योजनाएं प्रस्तावित की गईं, लेकिन अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई हैं। शहर में अगर अतिरिक्त वाटर टैंक का निर्माण होता है तो आने वाले भविष्य में लोगों को पानी की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।
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कोट
शहरवासियों की ओर से लगातार पानी की किल्लत को लेकर शिकायतें आने लगी थी। सरकार ने अब नहरी पानी के शेड्यूल में बदलाव करके लोगों को राहत दी है। अब लोगों को पानी की समस्या नहीं होगी। हमारी ओर से अब रेगूलर पानी की सप्लाई दी जाएगी। 7 अप्रैल को नहर में दोबारा से पानी छोड़ने की संभावना है।
अजय यादव- जेई, जनस्वास्थ्य विभाग, रेवाड़ी