संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। राजस्थान के भगाना गांव में पहुंचा बाघ फिर रेवाड़ी के गांव झाबुआ के जंगल में पहुंच गया है। गांव झाबुआ में बाघ के पंजों के निशान पाए गए हैं। बाध को पकड़ने के लिए वन विभाग ने गुजरात के गीर से बड़ा पिंजरा मंगवाया है। गांव झाबुआ में बाघ के आने से फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
झाबुआ के जंगल में बाघ के आने से वन विभाग की टीम फिर चिंतित है। वन विभाग की टीम को बाघ को पकड़ने में सफलता नहीं मिली। वन विभाग के अधिकारियों ने अब बाघ को पकड़ने के लिए गुजरात के गीर से एक बड़ा पिंजरा मंगवाया है। इस बार वन विभाग को पूरी उम्मीद है कि गुजरात से लाए गए पिंजरे में बाघ जरूर कैद होगा। इससे पहले जब बाघ झाबुआ के जंगल में था तो उसे पकड़ने के लिए शिकार की व्यवस्था की गई थी जिससे बाघ अपना पेट भर लेता था। आशंका जताई जा रही है कि राजस्थान में पहुंचे बाघ को शिकार नहीं मिला होगा जिससे वह फिर झाबुआ में लौट आया है। इस बार पूरी उम्मीद है कि बाघ पिंजरे में मांस के लालच में जरूर कैद हो जाएगा।
बाघ को पकड़ने के लिए सरिस्का टीम की तरफ से झाबुआ बीहड़ में 10 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। वन विभाग की टीम ट्रैंकुलाइजर के साथ बाघ की तलाश में है। बाघ के राजस्थान पहुंचने के बाद टीम को कुछ राहत मिली थी लेकिन अब बाघ के झाबुआ के जंगल में आने की जानकारी मिलने पर फिर वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई है।
8 महीने पहले बाघ जंगल से निकलकर गया था रेवाड़ी
गौरतलब है कि 8 महीने पहले भी ये टाइगर सरिस्का के जंगल से निकलकर रेवाड़ी तक चला गया था। उस समय हरियाणा बॉर्डर के आस-पास गांव में वनकर्मियों पर हमला कर दिया था, जिसमें एक वनकर्मी को टाइगर ने दबोच लिया था, लेकिन वह बच गया था। वहीं, फॉरेस्टर बेहोश हो गया था। उससे पहले कोटकासिम के पास एक किसान पर हमला किया था। एक नीलगाय को खाने की भी पुष्टि हुई थी। इस बार खैरथल-तिजारा जिले में गत वीरवार को 6 घंटे में 4 लोगों पर बाघ ने हमला किया था।
वर्जन:
वन विभाग की टीम बाघ को पकड़ने के लिए कई दिनों से प्रयास कर रही है, मगर सफलता नहीं मिल रही है। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने अब बाघ को पकड़ने के लिए गुजरात के गीर से एक बड़े और विशेष पिंजरे को मंगवाया है।- प्रेम कुमार, वन रेंज अधिकारी, बावल