रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र पाल ने साइबर ठगी के मामले में आरोपी मुस्तफा की तरफ से दायर की गई नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोेपी पर एक महिला बैंककर्मी के साथ ऑनलाइन ठगी करने का आरोप है।
ठगी की घटना जुलाई 2025 में हुई थी। आरोपी मुस्तफा को 2 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उसने बताया था कि एक अन्य व्यक्ति रोहित ने खाता खुलवाया था और उसे 10 हजार देकर बैंक किट अपने पास रख ली थी। जांच से पता चला कि सह-अभियुक्त अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है।
आरोपी के अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि मुस्तफा निर्दोष है और उसका नाम केस में सीधे तौर पर नहीं है। उसने कोई राशि अपने पास नहीं रखी और जांच पूरी हो चुकी है। ऐसे में लंबी ट्रायल प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए उसे जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, पीड़िता पक्ष ने कहा कि धोखाधड़ी की राशि में आरोपी का फायदा हुआ है। सह-अभियुक्त रोहित अभी गिरफ्तारी से बाहर है। साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, और ऐसे मामलों में जमानत देने से गंभीर संदेश जाएगा।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और जांच सामग्री का अध्ययन करने के बाद कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में तकनीकी प्रगति के साथ ऐसे अपराध बढ़ रहे हैं। अभियुक्त के पीएनबी खाते में कथित तौर पर 32 हजार रुपये स्थानांतरित किए गए हैं। अन्य सह-अभियुक्तों की गिरफ्तारी अभी लंबित है और मुकदमा अभी शुरू होना बाकी है।
इसलिए अपराध और दंड की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त को इस प्रारंभिक चरण में जमानत पर स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता है। इसलिए मुस्तफा की जमानत याचिका खारिज की जाती है।
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आरोपी ने खुद को यूके निवासी बताया था
शिकायतकर्ता पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया था कि वह धारूहेड़ा में एक बैंक की शाखा में कार्यरत थीं। 11 जुलाई को उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली, जिसे स्वीकार करने के बाद आरोपी ने खुद को यूके निवासी बताया। बातचीत के दौरान उसने विश्वास जीतकर दावा किया कि उसने शिकायतकर्ता को कीमती सामान का पार्सल भेजा है। पार्सल को छुड़ाने के लिए विभिन्न बैंक खातों में कुल 3,31,000 जमा करने को कहा गया। जांच में पता चला कि इस राशि में से 32 हजार आरोपी मुस्तफा के पीएनबी खाते में ट्रांसफर किए गए।