संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में 50 प्रतिशत लोगों के आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) कार्ड अभी तक नहीं बने हैं। यह कार्ड बनने के बाद मरीज का पूरा विवरण ऑनलाइन होगा, जिसका जरूरत पड़ने पर लाभ मिलेगा।
आभा कार्ड बनवाने से लोगों को काफी लाभ मिलेगा। इसके बाद भी लोग इसे बनवाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कार्ड बनने के बाद भविष्य में व्यक्ति के अपने स्वास्थ्य का रिकार्ड मोबाइल में होगा और स्वास्थ्य जांच कराने पर चिकित्सक को इलाज की पूरी जानकारी नहीं बतानी पडे़गी। इतना ही नहीं किस किस बीमारी का वह इलाज करा चुके हैं इसकी भी जानकारी आनलाइन मिलेगी। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपना आभा बनाना होगा। इससे अपने मेडिकल रिकार्ड्स को डिजिटल स्टोर करते हुए कभी भी उपयोग कर सकते हैं। आभा कार्ड के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य का डाटा आनलाइन सुरक्षित रहेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि कोई व्यक्ति एक स्थान पर किसी बीमारी का इलाज करा रहा है और किसी कारण से दूसरे जिले या राज्य में जा रहा है तो वहां अपना इलाज इसी दवाई और परामर्श के आधार पर सुचारू करा सकते हैं।
आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस की तरह प्रत्येक व्यक्ति का आभा कार्ड बनाया जा रहा है। बैंक अकाउंट की तरह ही आम लोगों का एक हेल्थ आईडी बनाया जा रहा है। इसमें व्यक्ति के पूर्व में इलाज की पद्धति, ब्लड ग्रुप, बीमारी के प्रकार, किस प्रकार की दवा चली हुई है, सभी जानकारी उपलब्ध होंगे। इसमें एक क्यूआर कोड होगा जिसे किसी भी चिकित्सक के यहां दिखाने तथा स्कैन करने पर सारा रिकार्ड दिखेगा।
आभा हेल्थ आइडी कार्ड एक 14 अंकों का है यूनिक नंबर
आभा हेल्थ आइडी कार्ड एक 14 अंकों का यूनिक नंबर है जिसके साथ अपने सभी स्वास्थ्य रिकार्ड को डिजिटल रूप से लिंक कर सकते हैं। इससे मरीज को चिकित्सक के पास जाने पर रिपोर्ट साथ ले जाने की जरूरत नहीं होगी। 30 सेकेंड से भी कम समय में आधार नंबर या मोबाइल नंबर का उपयोग करके अपना आभा हेल्थ आईडी कार्ड बना सकते हैं।
वर्जन
अपने नजदीकी कामन सर्विस सेंटर या घर बैठे अपने मोबाइल से आभा कार्ड बनवा सकते हैं। आभा कार्ड बनेगा तो चिकित्सा का पूरा विवरण आनलाइन दर्ज होगा।-डॉ. भंवर सिंह, उप सिविल सर्जन।