सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया को ज्ञापन देतीं आशा वर्कर्स। स्रोत : संगठन
- फोटो : नहर से युवक के शव को निकालने का प्रयास करती पुलिस। स्रोत संवाद
रेवाड़ी। जिले की आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को लघु सचिवालय के गेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान 12 फरवरी को प्रस्तावित एक दिवसीय हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है। इसको लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने हरियाणा सरकार को संबोधित ज्ञापन सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया को सौंपा।
प्रदर्शन की अध्यक्षता कर रहीं आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य प्रधान सुनीता ने कहा कि आशा वर्कर्स लंबे समय से अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग और हरियाणा सरकार लगातार उनकी अनदेखी कर रही है।
वर्ष 2023 में बढ़ते कार्यभार और समय पर मानदेय न मिलने के कारण आशा वर्कर्स को 73 दिन लंबी हड़ताल करनी पड़ी थी। हड़ताल समाप्त कराने के लिए सरकार ने यूनियन से समझौता करते हुए हड़ताल अवधि का भुगतान करने का वायदा किया था।
आशा वर्कर्स ने हड़ताल समाप्त होते ही 73 दिन का बकाया कार्य पूरा कर दिया लेकिन सरकार ने अब तक हड़ताल का पैसा नहीं दिया है।
वक्ताओं ने बताया कि समझौते के दौरान सरकार ने यह भी आश्वासन दिया था कि प्रोत्साहन राशि से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा और ऑफलाइन सेल्फ अप्रेजल को समाप्त कर मानदेय भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा, लेकिन इन वायदों पर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इससे पूरे हरियाणा की आशा वर्कर्स में भारी रोष है। कार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।