हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की ओर से किसानों की अधिग्रहित भूमि का बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं देने पर एक बार फिर कोर्ट ने एचएसवीपी के अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक सहित तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उन्हें 14 जुलाई को कोर्ट में पेश करने के आदेश एसपी को दिए हैं। एचएसवीपी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ दूसरी बार कोर्ट ने वारंट जारी किए हैं।
जमीन के बढ़े हुए मुआवजे को लेकर एडिशनल सेशन जज डॉ. सुशील कुमार गर्ग की कोर्ट में चल रहे बाबूलाल बनाम हरियाणा सरकार व अन्य मामले में 4 याचिकाओं पर सुनवाई करते कोर्ट ने यह वारंट जारी किए हैं। इससे पूर्व भी कोर्ट की ओर से इन अधिकारियों के अरेस्ट वारंट जारी किए थे, जिसके बाद एचएसवीपी के अधिकारियों ने अरबों रुपये की मुआवजा राशि किसानों के खातों में जमा कराई थी।
मामले में जस्टिस गर्ग ने तीनों अधिकारियों को गत 23 मई को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मुआवजा राशि का भुगतान नहीं करने के बारे में जवाब मांगा था। अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं देने और कोर्ट में उपस्थित नहीं होने के कारण मंगलवार को एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक, गुरुग्राम प्रशासक और गुरुग्राम ईओ कम एलएओ के गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं।
जस्टिस डाॅ. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने एसपी को आदेश दिए हैं कि तीनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए डीएसपी की ड्यूटी लगाई जाए। उन्हें 14 जुलाई को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया जाए। गिरफ्तारी नहीं होने की सूरत में डीएसपी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर यह बताना होगा कि आदेशों की अनुपालना नहीं करने के पीछे क्या कारण रहा।
एक बार फिर अधिकारियों पर संकट
पूर्व में भी डाॅ. गर्ग की अदालत ने एक अन्य मामले में कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए तीनों अधिकारियों के अरेस्ट वारंट जारी किए थे। कोर्ट में पेश करने की तारीख से पहले ही एचएसवीपी की ओर से इन किसानों के खातों में बढ़ी हुई मुआवजा राशि के करोड़ों रुपए जमा कराने के बाद गिरफ्तारी से बचाव किया था। अब एक बार फिर से गिरफ्तारी वारंट जारी होने से इन अधिकारियों में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है।