रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विकास गुप्ता की अदालत ने मारपीट और हत्या के प्रयास के मामले में दो आरोपियों फरीदपुर निवासी पवन कुमार और करसारा निवासी विनय उर्फ अजय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
मामला थाना रामपुरा में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। शिकायतकर्ता प्रीति ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसके पति खेमचंद के साथ ठेकेदार भगीरथ, पवन कुमार और विनय उर्फ अजय ने मारपीट की थी।
आरोपियों ने पहले उसके पति के साथ अभद्र व्यवहार किया और बाद में निकट रेलवे लाइन के पास बुलाकर हमला कर दिया। इलाज के दौरान उनकी दोनों भुजाओं में गंभीर क्षति हुई।
अग्रिम जमानत याचिका में पवन कुमार और विनय उर्फ अजय ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि एफआईआर सुनी-सुनाई बातों के आधार पर दर्ज हुई है और घटना के संबंध में कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए आरोपियों ने दावा किया कि पीड़ित सामान्य स्थिति में दिखाई दे रहा था।
वहीं राज्य पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों आरोपी एफआईआर में नामजद हैं और पीड़ित को गंभीर चोटें पहुंचाने के आरोपों का सामना कर रहे हैं। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियारों की बरामदगी अभी बाकी है तथा आरोपियों से पूछताछ आवश्यक है।
10 जून को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और जांच की जरूरत को देखते हुए आरोपियों को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।